kabhi asar na mire harf-e-muddaa men rahana ikhtiyaar koi dast-e-na-rasa men raha | कभी असर न मिरे हर्फ़-ए-मुद्दआ' में रहा

  - Tahira Jabeen
कभीअसरमिरेहर्फ़-ए-मुद्दआ'मेंरहा
इख़्तियारकोईदस्त-ए-ना-रसामेंरहा
नसीब-ए-दुख़्तर-ए-हव्वाजफ़ा-ओ-जौर-ओ-सितम
शुमारहुस्न-ओ-नज़ाकतमेंऔरवफ़ामेंरहा
अमीर-ए-शहरकिथाज़ो'म-ए-इक़्तिदारमेंगुम
ग़रीब-ए-शहरसदाजब्र-ए-नारवामेंरहा
उतरगयारग-ओ-पैमेंवोज़हरकीमानिंद
मिसाल-ए-शहदजोइकशख़्सइब्तिदामेंरहा
मैंहोसकीकभीअपनीज़ाततकमहदूद
हरएकफूलचमनकामिरीदु'आमेंरहा
मैंवोमरीज़हूँजिसकेलिएकोईअसर
किसीकेहर्फ़-ए-तसल्लीमेंऔरदु'आमेंरहा
वोमुझकोदेखकेकरतारहाहैअन-देखा
अजीबतर्ज़-ए-तग़ाफ़ुलभीए'तिनामेंरहा
  - Tahira Jabeen
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy