ghadi do ghadi ki masarrat | घड़ी दो घड़ी की मसर्रत

  - Tabish Kamal
घड़ीदोघड़ीकीमसर्रत
येसदियोंपेफैलाहुआदेव-क़िस्साहमारेलहूमेंरवाँहै
किसीघोंसलेमेंसेअंडेचुराताहुआसूरमा
एकचीतेसेगुरसीखताकोईबच्चा
कमाँखींचताऔरमादाकोनावकसेनीचेगिराताहुआ
आगदरयाफ़्तकरताहुआकोईलड़का
अजबसूरतेंहैं
शब-ए-दास्ताँ-गोईसदियोंपेफैलीहुईहै
हवामर्ग़-ज़ारोंकीयख़-बस्तगीमेंनहींरहसकी
सोयहाँगईहैकिअपनाबदनगर्मकरले
येआगअबजिबिल्लतकीतरतीबकालाज़िमाहै
बहीमानाख़सलतकोतस्कीनदेताहुआएकउंसुर
हवादेव-मालाओंकेदौरकीएकबुढ़ियाहै
जिसकोहरइकदास्ताँयादहै
येघड़ीदोघड़ीकीमसर्रत
जिसेदास्ताँ-गोकीबातोंसेहमनेकियाहैकशीद
एकदिनआएगाजबहवाअपनेक़िस्सेमेंवोसूरतेंलाएगी
जिनकाआईनाहमहैं
शब-ए-दास्ताँ-गोईमेंहमजोमबहूतहैरानबैठेहुए
दास्तानसुनरहेहैं
कभीएकठिठुरीहुईरातमेंहमकहानीकामरकज़बनेंगे
जोबच्चेअदमहैं
हमेंदास्ताँमेंघिरादेखकरखिलखिलाएँगे
मबहूत-ओ-हैराँहोंगे
  - Tabish Kamal
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