takhtiyan sab utaar dii gaii hain | तख़्तियाँ सब उतार दी गई हैं

  - Tabinda Sahar Abidi
तख़्तियाँसबउतारदीगईहैं
मिरेघरकाकहींपताहीनहीं
रेग-ए-बिरयाँपेचलकेआएहैं
पाँवमेंकोईआबलाहीनहीं
ज़ख़्म-ए-दिलकोतलाश-ए-मरहमथी
औरमरहमकहींमिलाहीनहीं
हमनेदस्तकतोदीबहुतलेकिन
फिरकोईदरकभीखुलाहीनहीं
ज़िंदगीसेकभीबनीमिरी
मौतपरइख़्तियारथाहीनहीं
धूपभीक़हरबनकेबरसीऔर
साएबाँरेतसेबनाहीनहीं
  - Tabinda Sahar Abidi
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