garmiyon ke mausam men | गर्मियों के मौसम में

  - Tabassum Zia
गर्मियोंकेमौसममें
लालटैनकीआगसेंकतेहैं
तोठंडाबल्बमुस्कुराताहै
औरहमारीबेबसीपरमुँहचिड़ाताहै
बहुतसीहड्डियाँ
खालकेथैलेमेंपड़ीचुभतीरहतीहैं
रोज़ानाकईकुत्ते
ख़ुराककीतलाशमेंमसरूफ़
कचरेकेढेरपे
एकदूसरेपरग़ुर्रातेहैं
ज़मीनकेबालोंमेंकंघीकरती
गर्मसर्दहवाएँ
ख़यालोंकीपुरानीदेगमेंबासमारतेख़्वाब
कोलुहओंकीभट्टीकेपासजलतासर्दख़ून
आहेंभरतीपैरोंमेंबिखरीसिसकियाँ
अंजानसड़कपेउधड़ापड़ाला-वारिसपेट
जिसेअजनबीशो'बदा-बाज़
हँसीकीठोकरेंमारकरगुज़रजातेहैं
  - Tabassum Zia
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Zulf Shayari

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