rakha sanjo ke gauhar-e-naayaab ki tarah | रक्खा संजो के गौहर-ए-नायाब की तरह

  - Tabassum Azmi
रक्खासंजोकेगौहर-ए-नायाबकीतरह
सौंपीथीजोबुज़ुर्गोंनेआदाबकीतरह
उठतेहीउनकेहर्फ़भीसारेबिखरगए
जिनकावजूदघरमेंथाएराबकीतरह
कुछखुरदुरेसेधागेभीचादरमेंउसकीहैं
कबज़िंदगीहैरेशम-ओ-कम-ख़्वाबकीतरह
दुखहीनहींहैंज़हर-ए-हलाहलफ़क़तयहाँ
सुखभीमिलाहैबारहाज़हराबकीतरह
अक्सरहुआहैऐसाकिछोटीसीमौजभी
सबकुछबहाकेलेगईसैलाबकीतरह
  - Tabassum Azmi
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