qafas se chhootne ki kab havas hai | क़फ़स से छूटने की कब हवस है

  - Taban Abdul Hai
क़फ़ससेछूटनेकीकबहवसहै
तसव्वुरभीचमनकाहमकोबसहै
बजाएरख़्ना-ए-दीवार-ए-गुलशन
हमेंसय्यादअबचाक-ए-क़फ़सहै
फ़ुग़ाँकरताहीरहताहैयेदिनरात
इलाहीदिलहैमेरायाजरसहै
कटेंगेउम्रकेदिनकबकेबे-यार
मुझेइकइकघड़ीसौसौबरसहै
हमारीदादकेतईंकौनपहुँचे
कुइमूनिसकुइफ़रियाद-रसहै
गलीमेंयारकीहोजाइएख़ाक
मिरेदिलमेंयेमुद्दतसेहवसहै
सफ़रदुनियासेकरनाक्याहै'ताबाँ'
अदमहस्तीसेराह-ए-यक-नफ़सहै
  - Taban Abdul Hai
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