subh-e-bahaar-o-shaam-e-khizaan kuchh na kuchh to ho | सुब्ह-ए-बहार-ओ-शाम-ए-ख़िज़ाँ कुछ न कुछ तो हो

  - Tab Aslam
सुब्ह-ए-बहार-ओ-शाम-ए-ख़िज़ाँकुछकुछतोहो
बे-नामज़िंदगीकानिशाँकुछकुछतोहो
ख़ामोशियोंकीआगमेंजलताहैमय-कदा
दिल-दादगान-ए-शो'ला-रुख़ाँकुछकुछतोहो
जीनेकेवास्तेकोईसूरततोचाहिए
होशम-ए-अंजुमनकिधुआँकुछकुछतोहो
चुपचुपहैमौजऔरकिनारेउदासहैं
ज़िंदगीकेसैल-ए-रवाँकुछकुछतोहो
सुब्ह-ए-अज़लकारूपकिशाम-ए-अबदकागीत
सायाहोधूपहोकिगुमाँकुछकुछतोहो
साक़ीनएचराग़मुबारकतुझेमगर
जोबुझचुकेहैंउनकाबयाँकुछकुछतोहो
कोईहसीनगीतकोईरस-भरीग़ज़ल
यारोइलाज-ए-ग़म-ज़दगाँकुछकुछतोहो
मानाकि'ताब'यूँँभीगुज़रजाएगीमगर
ज़िक्र-ए-जमाल-ए-गुल-बदनाँकुछकुछतोहो
  - Tab Aslam
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