mere ruksaar se zulfoon ko vo jab jab hataata hai | मेरे रुख़सार से जुल्फ़ों को वो जब जब हटाता है

  - Dr Bhagyashree Joshi
मेरेरुख़सारसेजुल्फ़ोंकोवोजबजबहटाताहै
वोकहताहैनज़रउसकोमह-ए-ख़ुर्शीदआताहै
लगाकरकानकेपीछेमेरीआँखोंकाहीकाजल
ज़मानेकीबुरीनज़रोंसेमुझकोयूँँबचाताहै
मुहब्बतमुद्दतोंकेबादबिखरीहैहथेलीपर
हिनाकारंगउसकेइश्क़कीहदकोबताताहै
मैंहूँइससोचमेंहरदमकभीहोगामुकम्मलक्या
सुनाहैइश्क़सच्चाहोतोकामिलहोपाताहै
सुनोतूफ़ाँसेदावानलकोक्याबुझतेकभीदेखा
वहीदीपकहवाकाएकझोंकासहपाताहै
यहीकहतेहुएजबभीवोसरपरहाथरखताहै
मेरेअंदरकाडरपलभरमेंजैसेखोहीजाताहै
क़ज़ाआईथीकलमिलनेउसेयेकहकेरोकाहै
जनाज़ाएकलड़कीकापियाकेघरसेजाताहै
  - Dr Bhagyashree Joshi
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