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Sumit Yadav
ye dikhaava jo ki.e ja raha hai tu ai dost
ye dikhaava jo ki.e ja raha hai tu ai dost | ये दिखावा जो किए जा रहा है तू ऐ दोस्त
- Sumit Yadav
ये
दिखावा
जो
किए
जा
रहा
है
तू
ऐ
दोस्त
इस
से
तू
कोई
फ़रिश्ता
नहीं
होने
वाला
- Sumit Yadav
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किरदार
वो
जो
मुझपे
हावी
हो
गया
मैं
बदला
और
थोड़ा
नवाबी
हो
गया
अच्छा
भला
सीधा
सा
लड़का
था
कभी
उस
के
ही
चक्कर
में
शराबी
हो
गया
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Sumit Yadav
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दरिया
पास
लिए
फिरते
हैं
फिर
क्यूँ
प्यास
लिए
फिरते
हैं
वो
मज़लूम
नहीं
दोषी
था
जिसकी
आस
लिए
फिरते
हैं
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रूबरू
वो
हो
तो
कैसे
कुछ
बात
हो
फिर
भी
दिल
चाहता
है
मुलाक़ात
हो
क्यूँँ
ये
बे-वक़्त
ही
बरसे
बादल
यहाँ
साथ
में
जब
रहे
वो
तो
बरसात
हो
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Sumit Yadav
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आँखों
से
जो
उतर
गया
हूँ
मैं
फिर
न
जाने
किधर
गया
हूँ
मैं
ज़िंदगी
में
कमी
थी
पहले
कुछ
उसको
पाकर
के
भर
गया
हूँ
मैं
अपने
धुतकारने
लगे
हैं
सब
सबको
कितना
अखर
गया
हूँ
मैं
बे-वफ़ा
होना
सीखा
है
उस
सेे
वादों
से
भी
मुकर
गया
हूँ
मैं
उसके
होने
से
ही
तो
ज़िंदा
था
उस
से
कह
दो
कि
मर
गया
हूँ
मैं
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Sumit Yadav
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ग़ज़ल
तुझ
पर
मैं
कहना
चाहता
हूँ
तू
क्या
है
मैं
बताना
चाहता
हूँ
तू
समझे
दिल-लगी
को
खेल
कोई
मैं
फिर
भी
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
मैं
हूँ
मयख़ाने
में
तो
क्या
है
हैरत
मैं
ख़ुद
भी
ग़म
भुलाना
चाहता
हूँ
मुझे
उसकी
नज़र
से
जो
बचा
ले
कोई
ऐसा
बहाना
चाहता
हूँ
मुसलसल
बहती
हैं
आँखें
मिरी
अब
मैं
भी
सागर
बनाना
चाहता
हूँ
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Sumit Yadav
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