आँखों से जो उतर गया हूँ मैं

  - Sumit Yadav
आँखोंसेजोउतरगयाहूँमैं
फिरजानेकिधरगयाहूँमैं
ज़िंदगीमेंकमीथीपहलेकुछ
उसकोपाकरकेभरगयाहूँमैं
अपनेधुतकारनेलगेहैंसब
सबकोकितनाअखरगयाहूँमैं
बे-वफ़ाहोनासीखाहैउससेे
वादोंसेभीमुकरगयाहूँमैं
उसकेहोनेसेहीतोज़िंदाथा
उससेकहदोकिमरगयाहूँमैं
  - Sumit Yadav
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