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Sumit Yadav
Ankhon se jo utar gaya hun main
आँखों से जो उतर गया हूँ मैं
- Sumit Yadav
आँखों
से
जो
उतर
गया
हूँ
मैं
फिर
न
जाने
किधर
गया
हूँ
मैं
ज़िंदगी
में
कमी
थी
पहले
कुछ
उसको
पाकर
के
भर
गया
हूँ
मैं
अपने
धुतकारने
लगे
हैं
सब
सबको
कितना
अखर
गया
हूँ
मैं
बे-वफ़ा
होना
सीखा
है
उस
सेे
वादों
से
भी
मुकर
गया
हूँ
मैं
उसके
होने
से
ही
तो
ज़िंदा
था
उस
से
कह
दो
कि
मर
गया
हूँ
मैं
- Sumit Yadav
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चारा-गर
से
मिलकर
जाना
दिल
नासाज़
लिए
फिरते
हैं
Sumit Yadav
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ऐसा
भी
तो
हो
सकता
था
वो
मेरा
हो
तो
सकता
था
उसने
ही
तो
मुझे
सँभाला
वर्ना
मैं
भी
खो
सकता
था
हाथ
छुड़ा
कर
जाने
वाला
बाहों
में
भी
सो
सकता
था
मैंने
खोया
भी
तो
उसको
वो
जो
मेरा
हो
सकता
था
तुम
पहले
मिलते
तो
कहते
मैं
क्या
था
क्या
हो
सकता
था
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Sumit Yadav
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घर
में
दो
वक़्त
की
रोटी
के
भी
लाले
होंगे
हाँ
मगर
हाथ
में
हर
शख़्स
के
प्याले
होंगे
था
मैं
अंजान
तो
समझा
था
कि
दुनिया
में
सभी
लोग
हैं
जो
भी
बुरे
शक्ल
से
काले
होंगे
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Sumit Yadav
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रूबरू
वो
हो
तो
कैसे
कुछ
बात
हो
फिर
भी
दिल
चाहता
है
मुलाक़ात
हो
क्यूँँ
ये
बे-वक़्त
ही
बरसे
बादल
यहाँ
साथ
में
जब
रहे
वो
तो
बरसात
हो
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Sumit Yadav
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ये
दिखावा
जो
किए
जा
रहा
है
तू
ऐ
दोस्त
इस
से
तू
कोई
फ़रिश्ता
नहीं
होने
वाला
Sumit Yadav
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