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Shashank Shekhar Pathak
chaaha main ne saath tumhaara bas ek do mulaqaat nahin
chaaha main ne saath tumhaara bas ek do mulaqaat nahin | चाहा मैं ने साथ तुम्हारा बस एक दो मुलाक़ात नहीं
- Shashank Shekhar Pathak
चाहा
मैं
ने
साथ
तुम्हारा
बस
एक
दो
मुलाक़ात
नहीं
मैं
सावन
की
बारिश
हूँ
कोई
बे-मौसम
बरसात
नहीं
तुम
क्या
जानो
क्या
गुज़री
जब
तुमने
मुझको
था
छोड़
दिया
तुमको
तो
बस
ये
लगता
था
छोड़
दिया
कोई
बात
नहीं
सबका
हाल
यही
होता
है
इश्क़
में
जो
हारा
होता
है
दिन
तो
कट
जाता
है
लेकिन
कटती
है
तन्हा
रात
नहीं
- Shashank Shekhar Pathak
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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना
था
वो
ख़्वाब
में
भी
मिले
मैं
नींद
नींद
को
तरसा
मगर
नहीं
सोया
ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल
था
कि
थम
गई
बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म
है
कि
मैं
नहीं
रोया
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Khalil Ur Rehman Qamar
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वो
ग़ुस्से
में
सीधी
बात
नहीं
करता
तूफ़ानों
में
बारिश
तिरछी
होती
है
Ankit Maurya
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मेरी
आँखों
से
बारिश
पूछती
है
तुम्हारा
क्या
कोई
मौसम
नहीं
है
100rav
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मेहरबाँ
हम
पे
हर
इक
रात
हुआ
करती
थी
आँख
लगते
ही
मुलाक़ात
हुआ
करती
थी
हिज्र
की
रात
है
और
आँख
में
आँसू
भी
नहीं
ऐसे
मौसम
में
तो
बरसात
हुआ
करती
थी
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Ismail Raaz
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ख़्वाब
पलकों
की
हथेली
पे
चुने
रहते
हैं
कौन
जाने
वो
कभी
नींद
चुराने
आए
मुझ
पे
उतरे
मेरे
अल्हाम
की
बारिश
बन
कर
मुझ
को
इक
बूॅंद
समुंदर
में
छुपाने
आए
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Khalil Ur Rehman Qamar
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कच्चा
सा
घर
और
उस
पर
जोरों
की
बरसात
है
ये
तो
कोई
खानदानी
दुश्मनी
की
बात
है
Saahir
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धूप
तो
धूप
ही
है
इसकी
शिकायत
कैसी
अब
की
बरसात
में
कुछ
पेड़
लगाना
साहब
Nida Fazli
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जाने
कैसे
ख़ुश
रहने
की
आदत
डाली
जाती
है
उनके
यहाँ
तो
बारिश
में
भी
धूप
निकाली
जाती
है
Ritesh Rajwada
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मैं
कि
काग़ज़
की
एक
कश्ती
हूँ
पहली
बारिश
ही
आख़िरी
है
मुझे
Tehzeeb Hafi
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तुम्हें
मैं
क्या
बताऊँ
इस
शहर
का
हाल
कैसा
है
यहाँ
बारिश
तो
होती
है
मगर
सावन
नहीं
आता
Bhaskar Shukla
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जो
तस्वीर
तेरी
है
कमरे
में
मेरे
रुलाती
है
अक्सर
वो
तस्वीर
तेरी
Shashank Shekhar Pathak
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कि
हूँ
मसरूफ़
मैं
इतना
तुम्ही
को
याद
करने
में
तुम्ही
को
याद
करना
ही
मैं
अक्सर
भूल
जाता
हूँ
Shashank Shekhar Pathak
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जुर्म
किसका
किसके
सर
इल्ज़ाम
आया
आज
रोया
जाके
तब
आराम
आया
हो
रही
थी
जंग
उसके
नाम
पर
और
वो
ही
मेरे
दुश्मनों
के
काम
आया
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Shashank Shekhar Pathak
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जिसकी
ख़ातिर
हम
भुला
बैठे
हैं
दुनिया
दोस्तों
से
ही
उन्हें
फ़ुर्सत
नहीं
है
Shashank Shekhar Pathak
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क्यूँँ
लगाऊँ
जाँ
की
बाज़ी
दिल
के
कारोबार
में?
बिक
रही
है
जब
मोहब्बत
इश्क़
के
बाज़ार
में
हारनी
थी
जंग
मुझको
जीतना
मुझको
न
था
वर्ना
इतना
दम
नहीं
था
उस
सिपहसालार
में
लाख
चाहूँ
मैं
छुपाना
पर
छुपा
पाता
नहीं
ज़िक्र
उसका
आ
ही
जाता
है
मिरे
अश'आर
में
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Shashank Shekhar Pathak
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