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Sohil Barelvi
pyaar men har KHat yuñ lagta hai
pyaar men har KHat yuñ lagta hai | प्यार में हर ख़त यूँँ लगता है
- Sohil Barelvi
प्यार
में
हर
ख़त
यूँँ
लगता
है
पहले
प्यार
का
पहला
ख़त
है
- Sohil Barelvi
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जब
प्यार
नहीं
है
तो
भुला
क्यूँँ
नहीं
देते
ख़त
किस
लिए
रक्खे
हैं
जला
क्यूँँ
नहीं
देते
Hasrat Jaipuri
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एक
भी
उम्मीद
की
चिट्ठी
इधर
आती
नहीं
हो
न
हो
अपने
समय
का
डाकिया
बीमार
है
Kunwar Bechain
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मेरे
महबूब
मत
बेचैन
होना
तेरे
क़ासिद
ने
ख़त
पहुँचा
दिया
है
Shajar Abbas
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चिट्ठी
लिखने
में
इक
मुद्दत
लगती
है
पढ़ने
वाला
मिनटों
में
पढ़
लेता
है
Satya Prakash Soni
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तुम्हें
लौटा
रहा
हूँ
ख़त
तुम्हारे
कभी
तुम
क्या
थीं
ख़ुद
ही
देख
लेना
Gaurav Trivedi
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उस
के
ख़त
रात
भर
यूँँ
पढ़ता
हूँ
जैसे
कल
इम्तिहान
हो
मेरा
Zubair Ali Tabish
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लिक्खा
गया
न
कुछ
कभी
मुझ
सेे
जवाब
में
रक्खा
ही
रह
गया
है
तेरा
ख़त
किताब
में
Ankit Maurya
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हम
कुछ
ऐसे
उसके
आगे
अपनी
वफ़ा
रख
देते
हैं
बच्चे
जैसे
रेल
की
पटरी
पर
सिक्का
रख
देते
हैं
तस्वीर-ए-ग़म,
दिल
के
आँसू,
रंजो-नदामत,
तन्हाई
उसको
ख़त
लिखते
हैं
ख़त
में
हम
क्या
क्या
रख
देते
हैं
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Subhan Asad
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मुहब्बत
उठ
गई
दोनों
घरों
से
सुना
है
एक
ख़त
पकड़ा
गया
है
Anjum Ludhianvi
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यादों
की
रेल
आज
वहीं
आ
के
रुक
गई
खेले
थे
हम
जहाँ
कभी
पटरी
पे
बैठकर
Munawwar Rana
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साथ
देते
हैं
ऐसी
हालत
में
मुँह
नहीं
मोड़ते
मुसीबत
में
ख़्वाब
टूटा
तो
रोएँगी
आँखें
और
कुछ
भी
नहीं
हक़ीक़त
में
मैं
परिंदों
से
इश्क़
करता
था
कब
ठहरना
था
उन
की
आदत
में
उस
के
जाने
से
ये
हुआ
मालूम
और
क्या
क्या
नहीं
है
क़िस्मत
में
तू
भी
अपनी
तरह
नहीं
निकला
मैं
भी
कुछ
और
था
हक़ीक़त
में
ग़ौर
से
देखता
नहीं
कम-ज़र्फ़
आदमी
खो
गया
है
औरत
में
आप
को
प्यार
चाहिए
तो
फिर
आप
क्यूँँ
मुब्तिला
हैं
नफ़रत
में
ज़ख़्म
देखे
तो
सब
हरे
निकले
आज
फिर
पड़
गया
हूँ
हैरत
में
कुछ
नहीं
माँगता
था
मैं
रब
से
फिर
भी
खोया
रहा
इबादत
में
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Sohil Barelvi
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अपने
दुख
को
भुला
दिया
मैं
ने
तेरे
दुख
को
समझ
लिया
मैं
ने
सिर्फ़
कमियाँ
तुझे
नज़र
आईं
छोड़
क्या
बोलूँ
क्या
किया
मैं
ने
ये
समुंदर
भी
ख़ाली
कर
दूँगा
एक
क़तरा
तो
पी
लिया
मैं
ने
अपनी
हालत
का
ख़ुद
हूँ
ज़िम्मेदार
जो
भी
अच्छा
लगा
किया
मैं
ने
था
नहीं
देखभाल
को
कोई
ज़ख़्म
आराम
से
सिया
मैं
ने
वो
समय
भी
मिरे
नसीब
में
था
था
तो
मुश्किल
मगर
जिया
मैं
ने
ज़हर
तेरे
लिए
बनाया
था
तेरे
हाथों
से
पी
लिया
मैं
ने
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Sohil Barelvi
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शहीदों
का
यहाँ
पर
ख़ूँ
बहा
है
ज़मीं
पर
सिर्फ़
मिट्टी
ही
नहीं
है
Sohil Barelvi
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तुम
मिरे
आस
पास
ही
रहना
मैं
अकेला
उदास
रहता
हूँ
Sohil Barelvi
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जो
तुम्हारा
था
मिल
गया
तुम
को
जो
हमारा
था
रह
गया
बाक़ी
Sohil Barelvi
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