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Sohil Barelvi
meri haalat ko dekh kar har shakhs
meri haalat ko dekh kar har shakhs | मेरी हालत को देख कर हर शख़्स
- Sohil Barelvi
मेरी
हालत
को
देख
कर
हर
शख़्स
मेरी
हिम्मत
की
दाद
देता
है
- Sohil Barelvi
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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मैदाँ
में
हार
जीत
का
यूँँ
फ़ैसला
हुआ
दुनिया
थी
उन
के
साथ
हमारा
ख़ुदा
हुआ
Jameel Malik
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दर्द
में
शिद्दत-ए-एहसास
नहीं
थी
पहले
ज़िंदगी
राम
का
बन-बास
नहीं
थी
पहले
Shakeel Azmi
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मुझे
यक़ीं
है
ये
ज़हमत
नहीं
करेगा
कोई
बिना
गरज़
के
मोहब्बत
नहीं
करेगा
कोई
न
ख़ानदान
में
पहले
किसी
ने
इश्क़
किया
हमारे
बाद
भी
हिम्मत
नहीं
करेगा
कोई
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Asad Taskeen
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तेरे
आने
की
इक
उम्मीद
है
और
इसी
उम्मीद
पर
क़ाएम
है
दुनिया
Shubham Sarkar
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किसी
से
छोटी
सी
एक
उम्मीद
बाँध
लीजिए
मोहब्बतों
का
अगर
जनाज़ा
निकालना
है
Shakeel Jamali
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मैं
अकेला
ही
चला
था
जानिब-ए-मंज़िल
मगर
लोग
साथ
आते
गए
और
कारवाँ
बनता
गया
Majrooh Sultanpuri
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मैं
तुझे
खो
के
भी
ज़िंदा
हूँ
ये
देखा
तूने
किस
क़दर
हौसला
हारे
हुए
इंसान
में
है
Abbas Tabish
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ऐसा
नहीं
कि
उन
से
मोहब्बत
नहीं
रही
जज़्बात
में
वो
पहली
सी
शिद्दत
नहीं
रही
Khumar Barabankvi
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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दूजी
वज्ह
से
दर
वा
नहीं
है
कोई
हम
से
रूठा
नहीं
है
सर
को
अपने
क्या
ढाँपे
हम
छत
पर
ही
जब
साया
नहीं
है
मुझ
को
जाना
तो
जानोगे
खोटा
सिक्का
खोटा
नहीं
है
दस्तक़
दो
हर
दूजे
घर
पर
हर
घर
का
दर
खुलता
नहीं
है
चलते
रहो
तुम
ये
खुलने
तक
जो
भी
गया
क्यूँँ
लौटा
नहीं
है
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Sohil Barelvi
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कुछ
देर
बाद
डूब
गईं
ऐसे
ख़्वाहिशें
पानी
में
जैसे
गर्क़
हो
काग़ज़
की
कोई
नाव
Sohil Barelvi
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मुझे
इस
बात
का
डर
खा
रहा
है
कोई
सच
मुच
बदलता
जा
रहा
है
मैं
सच
का
सामना
करने
लगा
हूँ
मुझे
भी
आइना
अब
भा
रहा
है
मुझे
भी
जानना
है
जल्द
ही
अब
तू
इतना
क्यूँँ
बदलता
जा
रहा
है
मैं
सब
से
हट
के
चलना
चाहता
हूँ
कोई
मेरी
तरफ़
क्यूँँ
आ
रहा
है
तिरे
दीदार
में
कैसी
कशिश
थी
मिरा
चेहरा
दमकता
जा
रहा
है
कोई
अंदर
ही
अंदर
रोने
वाला
मेरी
लिक्खी
ग़ज़ल
को
गा
रहा
है
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Sohil Barelvi
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वक़्त
कुछ
बाग़बाँ
अगर
देगा
सूखता
पेड़
भी
समर
देगा
हार
जाऊँगा
एक
दिन
मैं
भी
तू
भी
इक
दिन
मुआ'फ़
कर
देगा
हो
चुके
ठीक
पाँव
के
छाले
अब
मुझे
लुत्फ़
कुछ
सफ़र
देगा
जब
ख़ुदा
के
है
हाथ
में
सब
कुछ
मेरी
मुश्किल
भी
ख़त्म
कर
देगा
और
ज़रूरत
नहीं
इलाज
की
अब
मेरा
हँसना
ही
ज़ख़्म
भर
देगा
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Sohil Barelvi
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अपने
दुख
को
भुला
दिया
मैं
ने
तेरे
दुख
को
समझ
लिया
मैं
ने
सिर्फ़
कमियाँ
तुझे
नज़र
आईं
छोड़
क्या
बोलूँ
क्या
किया
मैं
ने
ये
समुंदर
भी
ख़ाली
कर
दूँगा
एक
क़तरा
तो
पी
लिया
मैं
ने
अपनी
हालत
का
ख़ुद
हूँ
ज़िम्मेदार
जो
भी
अच्छा
लगा
किया
मैं
ने
था
नहीं
देखभाल
को
कोई
ज़ख़्म
आराम
से
सिया
मैं
ने
वो
समय
भी
मिरे
नसीब
में
था
था
तो
मुश्किल
मगर
जिया
मैं
ने
ज़हर
तेरे
लिए
बनाया
था
तेरे
हाथों
से
पी
लिया
मैं
ने
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Sohil Barelvi
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