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Sohil Barelvi
banaa daala mujhe apni tarah aur
banaa daala mujhe apni tarah aur | बना डाला मुझे अपनी तरह और
- Sohil Barelvi
बना
डाला
मुझे
अपनी
तरह
और
नरक
के
द्वार
तक
ले
आई
दुनिया
- Sohil Barelvi
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टक
गोर-ए-ग़रीबाँ
की
कर
सैर
कि
दुनिया
में
उन
ज़ुल्म-रसीदों
पर
क्या
क्या
न
हुआ
होगा
Meer Taqi Meer
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इतने
दुख
से
भरी
है
ये
दुनिया
आँख
खुलते
ही
आँख
भर
आए
shampa andaliib
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जहाँ
जो
था
वहीं
रहना
था
उस
को
मगर
ये
लोग
हिजरत
कर
रहे
हैं
Liaqat Jafri
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ये
दुनिया
ग़म
तो
देती
है
शरीक-ए-ग़म
नहीं
होती
किसी
के
दूर
जाने
से
मोहब्बत
कम
नहीं
होती
Unknown
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सगी
बहनों
का
जो
रिश्ता
रिश्ता
है
उर्दू
और
हिन्दी
में
कहीं
दुनिया
की
दो
ज़िंदा
ज़बानों
में
नहीं
मिलता
Munawwar Rana
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तुम
हुस्न
की
ख़ुद
इक
दुनिया
हो
शायद
ये
तुम्हें
मालूम
नहीं
महफ़िल
में
तुम्हारे
आने
से
हर
चीज़
पे
नूर
आ
जाता
है
Sahir Ludhianvi
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ये
जितने
मसाइल
हैं
दुनिया
में,
सब
तुझे
देखने
से
सुलझ
जाएँगे
Siddharth Saaz
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कल
जहाँ
दीवार
थी
है
आज
इक
दर
देखिए
क्या
समाई
थी
भला
दीवाने
के
सर
देखिए
Javed Akhtar
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यक़ीं
मोहकम
अमल
पैहम
मोहब्बत
फ़ातेह-ए-आलम
जिहाद-ए-ज़िंदगानी
में
हैं
ये
मर्दों
की
शमशीरें
Allama Iqbal
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इसी
होनी
को
तो
क़िस्मत
का
लिखा
कहते
हैं
जीतने
का
जहाँ
मौक़ा
था
वहीं
मात
हुई
Manzar Bhopali
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कोई
उम्मीद
तो
न
थी
लेकिन
एक
रिश्ता
बचा
लिया
मैं
ने
Sohil Barelvi
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वो
कहीं
और
हो
गया
मसरूफ़
मैं
भी
अपनी
तरफ़
चला
आया
Sohil Barelvi
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कौन
सुनेगा
दुखड़े
मेरे
मैं
वो
पेड़
हूँ
जिस
की
जड़
पर
पानी
कह
कर
सब
ने
अब
तक
बस
तेज़ाब
ही
डाला
है
Sohil Barelvi
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मैं
अपनी
कैफ़ियत
से
अब
जुदा
हूँ
उसे
ख़ुश
देख
कर
ख़ुश
हो
रहा
हूँ
इधर
मंज़िल
नहीं
है
जानता
हूँ
मगर
फिर
भी
तिरी
जानिब
चला
हूँ
मुझे
पागल
कहा
करता
था
इक
शख़्स
नहीं
था
कल
तलक
अब
हो
गया
हूँ
ज़ियादा
अब
नहीं
करता
हूँ
मन
की
किसी
को
ग़ौर
से
सुनने
लगा
हूँ
कहीं
पर
दिल
नहीं
लगता
है
मेरा
तिरे
पहलू
में
इक
मुद्दत
रहा
हूँ
मिरे
पीछे
था
जो
आसेब
मैं
अब
उसी
आसेब
के
पीछे
पड़ा
हूँ
मिरे
हिस्से
का
सब
कुछ
लुट
चुका
है
मैं
अब
बर्बाद
होने
जा
रहा
हूँ
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Sohil Barelvi
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दर्द
भर
पूर
कर
लिया
मैं
ने
ज़ख़्म
नासूर
कर
लिया
मैं
ने
इश्क़
को
इश्क़
ही
फ़क़त
समझा
यार
को
दूर
कर
लिया
मैं
ने
एक
पत्थर
पे
यूँँ
रियाज़त
की
एक
दिन
हूर
कर
लिया
मैं
ने
ख़ूब
रोने
दिया
मगर
इक
दिन
दिल
को
मसरूर
कर
लिया
मैं
ने
और
दुख
थे
मुझे
तिरा
दुख
भी
दिल
में
मामूर
कर
लिया
मैं
ने
देर
तक
लड़
नहीं
सका
उस
से
ख़ुद
को
मजबूर
कर
लिया
मैं
ने
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Sohil Barelvi
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