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Sohil Barelvi
awwal se koshishon men hain dukh dard aur gham
awwal se koshishon men hain dukh dard aur gham | अव्वल से कोशिशों में हैं दुख दर्द और ग़म
- Sohil Barelvi
अव्वल
से
कोशिशों
में
हैं
दुख
दर्द
और
ग़म
लेकिन
चराग़-ए-ज़ब्त
मेरा
बुझ
नहीं
रहा
- Sohil Barelvi
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कुछ
ख़ुशियाँ
कुछ
आँसू
दे
कर
टाल
गया
जीवन
का
इक
और
सुनहरा
साल
गया
Unknown
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अब
उदास
फिरते
हो
सर्दियों
की
शामों
में
इस
तरह
तो
होता
है
इस
तरह
के
कामों
में
Shoaib Bin Aziz
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हम
तो
बचपन
में
भी
अकेले
थे
सिर्फ़
दिल
की
गली
में
खेले
थे
Javed Akhtar
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वो
रातें
चाँद
के
साथ
गईं
वो
बातें
चाँद
के
साथ
गईं
अब
सुख
के
सपने
क्या
देखें
जब
दुख
का
सूरज
सर
पर
हो
Ibn E Insha
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रूमाल
ले
लिया
है
किसी
माह-जबीन
से
कब
तक
पसीना
पोंछते
हम
आस्तीन
से
ये
आँसुओं
के
दाग़
हैं,
आँसू
ही
धोएँगे
ये
दाग़
धुल
न
पाएँगे
वाशिंग
मशीन
से
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Waseem Nadir
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शहर
का
तब्दील
होना
शाद
रहना
और
उदास
रौनक़ें
जितनी
यहाँ
हैं
औरतों
के
दम
से
हैं
Muneer Niyazi
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सीधा-साधा
डाकिया
जादू
करे
महान
एक
ही
थैले
में
भरे
आँसू
और
मुस्कान
Nida Fazli
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कोई
समुंदर,
कोई
नदी
होती
कोई
दरिया
होता
हम
जितने
प्यासे
थे
हमारा
एक
गिलास
से
क्या
होता
ताने
देने
से
और
हम
पे
शक
करने
से
बेहतर
था
गले
लगा
के
तुमने
हिजरत
का
दुख
बाट
लिया
होता
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Tehzeeb Hafi
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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यूँँ
ही
थोड़ी
मेरी
गज़लों
में
इतना
दुख
होता
है
इस
दुनिया
ने
हम
लड़कों
से
रोने
का
हक़
छीना
है
Harsh saxena
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कंठ
से
ज़हर
नीचे
आ
पहुँचा
भोले
शंकर
मदद
करो
मेरी
Sohil Barelvi
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मैं
भी
अना-परस्त
हूँ
इतना
नहीं
मगर
रोता
हो
कोई
सामने
और
देखता
रहूँ
Sohil Barelvi
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साहिल
भी
दोस्त
दूर
है
कश्ती
भी
ना-तवाँ
मुझ
को
तो
लौटना
भी
है
तुझ
को
उतार
के
Sohil Barelvi
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ज़रा
ख़्वाबों
से
सौदा
कीजिएगा
कभी
नींदों
को
पूरा
कीजिएगा
हमें
हर
काम
कर
के
ये
लगे
है
अभी
क्या
क्या
दोबारा
कीजिएगा
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Sohil Barelvi
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वहाँ
तक
रौशनी
क़ाइम
रहेगी
ये
नस्ल-ए-नौ
जहाँ
तक
जा
रही
है
Sohil Barelvi
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