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Sohil Barelvi
mujh ko har baar maaf karti hai
mujh ko har baar maaf karti hai | मुझ को हर बार माफ़ करती है
- Sohil Barelvi
मुझ
को
हर
बार
माफ़
करती
है
सिर्फ़
लड़की
नहीं
वो
देवी
है
एक
बुलबुल
ख़िज़ाँ
के
मौसम
से
शाख़-ए-दिल
पर
उदास
बैठी
है
आज़माने
के
बाद
कहता
हूँ
ये
उदासी
ख़ुशी
की
बेटी
है
उम्र
भर
मुन्तज़िर
रहा
जिस
का
तेरी
सूरत
उसी
के
जैसी
है
यार
पा
कर
भी
प्यार
को
तरसें
हम
गरीबों
की
बदनसीबी
है
जाने
वालों
को
क्या
पता
सोहिल
अंदरूँ
रूह
काँप
जाती
है
- Sohil Barelvi
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क्या
ख़ुशी
में
ज़िंदगी
का
होश
कम
रह
जाएगा
ग़म
अगर
मिट
भी
गया
एहसास-ए-ग़म
रह
जाएगा
Shakeel Badayuni
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दिल
गया
रौनक़-ए-हयात
गई
ग़म
गया
सारी
काएनात
गई
Jigar Moradabadi
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उदासी
का
सबब
उस
सेे
जो
हम
तब
पूछ
लेते
वजह
फिर
पूछनी
पड़ती
न
शायद
ख़ुद-कुशी
की
Dipendra Singh 'Raaz'
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अपनी
तबाहियों
का
मुझे
कोई
ग़म
नहीं
तुम
ने
किसी
के
साथ
मोहब्बत
निभा
तो
दी
Sahir Ludhianvi
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जानता
हूँ
एक
ऐसे
शख़्स
को
मैं
भी
'मुनीर'
ग़म
से
पत्थर
हो
गया
लेकिन
कभी
रोया
नहीं
Muneer Niyazi
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जैसे
उदास
करने
मुझे
आई
ईद
हो
तेरे
बगैर
कैसी
मिरी,
माई
ईद
हो
Sayeed Khan
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मुझे
ये
डर
है
तेरी
आरज़ू
न
मिट
जाए
बहुत
दिनों
से
तबीअत
मिरी
उदास
नहीं
Nasir Kazmi
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यही
बहुत
है
मिरे
ग़म
में
तुम
शरीक
हुए
मैं
हॅंस
पड़ूँगा
अगर
तुमने
अब
दिलासा
दिया
Imran Aami
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लाखों
सद
में
ढेरों
ग़म
फिर
भी
नहीं
हैं
आँखें
नम
इक
मुद्दत
से
रोए
नहीं
क्या
पत्थर
के
हो
गए
हम
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Azm Shakri
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मेरे
नादाँ
दिल
उदासी
कोई
अच्छी
शय
नहीं
देख
सूखे
फूल
पर
आती
नहीं
हैं
तितलियाँ
Deepak Vikal
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कोई
सूरत
तबस्सुम
की
नहीं
है
हमारा
कर्ब
बढ़ता
जा
रहा
है
Sohil Barelvi
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होते
हैं
मुझ
से
रू-ब-रू
आज़ार
जा-ब-जा
उस
पर
तेरे
सितम
हैं
मेरे
यार
जा-ब-जा
कार-ए-जहाँ
को
छोड़
तुम्हारी
तलाश
की
तुम
को
भी
हारे
ढूँढ़
के
सरकार
जा-ब-जा
ढूँढा
अकेले
तन्हा
हकीमों
को
शहर
भर
फिरता
रहा
अकेले
ही
बीमार
जा-ब-जा
सोहिल
न
जाने
इश्क़
में
कब
आएगा
वो
दिन
लैला
पुकारे
क़ैस
को
सरशार
जा-ब-जा
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Sohil Barelvi
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किसी
ने
गले
से
लगाया
न
ढारस
बँधाया
मैं
सद
में
से
बाहर
बहुत
देर
के
बाद
आया
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Sohil Barelvi
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जहाँ
तू
है
वहाँ
पर
हर
ख़ुशी
है
मिरी
जाँ
तू
बहार-ए-ज़िंदगी
है
न
जाने
क्यूँँ
मुझे
भी
लग
रहा
है
मोहब्बत
से
बड़ी
शय
दोस्ती
है
बरस
कर
ख़ुश्क
तू
तो
हो
चुका
है
मिरे
लब
पर
अभी
तक
तिश्नगी
है
तिरी
तस्वीर
को
मैं
देखता
हूँ
तिरी
तस्वीर
मुझ
को
देखती
है
अभी
हाथों
को
मेरे
छोड़ना
मत
ज़रा
सी
देर
की
बस
तीरगी
है
मोहब्बत
आप
की
दे
कर
ख़ुदा
ने
कमी
पैदाइशी
पूरी
करी
है
हमारे
ज़ख़्म
का
चारा
नहीं
है
हमारे
पास
केवल
शा'इरी
है
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Sohil Barelvi
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साल-हा-साल
बाद
भी
सोहिल
रस्तगारी
दुखों
से
मिल
न
सकी
Sohil Barelvi
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