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Sohil Barelvi
maut ko raasta diya main ne
maut ko raasta diya main ne | मौत को रास्ता दिया मैं ने
- Sohil Barelvi
मौत
को
रास्ता
दिया
मैं
ने
फिर
से
जी
कर
दिखा
दिया
मैं
ने
ख़ुद
को
जाने
वो
इस
लिए
उस
को
गिफ़्ट
में
आइना
दिया
मैं
ने
एक
दिन
सब
नज़र
मुझे
आया
एक
दिन
सब
भुला
दिया
मैं
ने
घर
इसी
फ़िक्र
में
लगे
सूना
उस
को
ऐसा
भी
क्या
दिया
मैं
ने
एक
दिन
रोते
रोते
साहिल
पर
उसके
ख़त
को
बहा
दिया
मैं
ने
जिस
ने
हर
वक़्त
मेरा
दिल
रक्खा
उसका
दिल
भी
दुखा
दिया
मैं
ने
सारे
'आशिक़
ख़मोश
हैं
सोहिल
अपना
क़िस्सा
सुना
दिया
मैं
ने
- Sohil Barelvi
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यहाँ
किसी
को
कोई
रास्ता
नहीं
देता
मुझे
गिरा
के
अगर
तुम
सँभल
सको
तो
चलो
Nida Fazli
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यक़ीन
हो
तो
कोई
रास्ता
निकलता
है
हवा
की
ओट
भी
ले
कर
चराग़
जलता
है
Manzoor Hashmi
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किताब
फ़िल्म
सफ़र
इश्क़
शा'इरी
औरत
कहाँ
कहाँ
न
गया
ख़ुद
को
ढूँढता
हुआ
मैं
Jawwad Sheikh
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अपनी
मर्ज़ी
से
कहाँ
अपने
सफ़र
के
हम
हैं
रुख़
हवाओं
का
जिधर
का
है
उधर
के
हम
हैं
Nida Fazli
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इस
तरह
करता
है
हर
शख़्स
सफ़र
अपना
ख़त्म
ख़ुद
को
तस्वीर
में
रखता
है
चला
जाता
है
Sandeep kumar
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अदाकार
के
कुछ
भी
बस
का
नहीं
है
मोहब्बत
है
ये
कोई
ड्रामा
नहीं
है
जिसे
तेरी
आँखें
बताती
हैं
रस्ता
वो
राही
कहीं
भी
पहुँचता
नहीं
है
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Zubair Ali Tabish
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मेरे
होंठों
के
सब्र
से
पूछो
उसके
हाथों
से
गाल
तक
का
सफ़र
Mehshar Afridi
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अब
ज़िन्दगी
से
कोई
मिरा
वास्ता
नहीं
पर
ख़ुद-कुशी
भी
कोई
सही
रास्ता
नहीं
Rahul
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न
हम-सफ़र
न
किसी
हम-नशीं
से
निकलेगा
हमारे
पाँव
का
काँटा
हमीं
से
निकलेगा
Rahat Indori
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फूल
से
लेकर
ये
धनिया
लाने
तक
के
इस
सफ़र
को
मुझको
तेरे
साथ
ही
तय
करने
की
ख़्वाहिश
है
पगली
Harsh saxena
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ख़ैरियत
उस
की
पूछते
रहना
जिस
की
हर
दम
दवाएँ
चलती
हों
Sohil Barelvi
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बात
अच्छी
बुरी
लगी
उस
को
कोई
दिखलाए
रौशनी
उस
को
एक
बीमार
है
बहुत
बीमार
काश
आ
जाए
मौत
ही
उस
को
एक
लड़की
मुझे
जो
देवी
है
क्यूँँ
सताता
है
आदमी
उस
को
अपना
ये
जिस्म
भी
नहीं
अपना
कौन
समझाए
हर
घड़ी
उस
को
उस
के
होने
से
चल
रही
धड़कन
मैं
ने
दे
दी
है
ज़िंदगी
उस
को
काम
आता
हूँ
यार
के
अब
भी
रास
आती
है
शा'इरी
उस
को
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Sohil Barelvi
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मैं
इजाज़त
एक
दो
को
दूँ
मगर
दुख
मेरे
दरवाज़े
पर
इक
दो
नहीं
Sohil Barelvi
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कई
ज़ख़्मों
की
रोज़ी
चल
रही
है
हमारी
आँख
में
इतनी
नमी
है
किसी
सूरत
मिला
रब
तो
कहूँगा
मिरी
तक़दीर
क्यूँँ
ऐसी
लिखी
है
तिरे
होने
से
है
क़ाइम
तबस्सुम
अगर
तू
ही
नहीं
तो
क्या
ख़ुशी
है
यहाँ
तन्हाई
का
इतना
असर
है
मिरी
आवाज़
भी
अब
दब
गई
है
किसी
पर
कर
नहीं
सकता
मैं
ज़ाहिर
वही
इक
बात
जो
दिल
पर
लगी
है
यहीं
रह
जाएगा
रक्खा
हुआ
सब
बरा-ए-नाम
की
ये
ज़िंदगी
है
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Sohil Barelvi
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दुख
छुपाना
बहुत
ज़रूरी
है
मुस्कुराना
बहुत
ज़रूरी
है
जाने
वालों
से
हम
ने
सीखा
है
पास
आना
बहुत
ज़रूरी
है
अब
तलक
सुन
लिया
बहुत
मैंने
अब
सुनाना
बहुत
ज़रूरी
है
एक
बीमार
है
बहुत
बीमार
देख
आना
बहुत
ज़रूरी
है
इश्क़
दोनों
को
है
तो
दोनों
को
अब
निभाना
बहुत
ज़रूरी
है
काम
कोई
करो
ये
ध्यान
रहे
दिल
लगाना
बहुत
ज़रूरी
है
घर
तो
बन
ही
गया
मगर
घर
को
घर
बनाना
बहुत
ज़रूरी
है
कैसा
इंसान
था
जो
कहता
था
ज़हर
खाना
बहुत
ज़रूरी
है
रूठ
कर
कह
रहा
मिरा
महबूब
अब
मनाना
बहुत
ज़रूरी
है
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Sohil Barelvi
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