kuchh ghadi ko hi yahaañ koii bhala lagta hai | कुछ घड़ी को ही यहाँ कोई भला लगता है

  - Sohil Barelvi
कुछघड़ीकोहीयहाँकोईभलालगताहै
चारदिनबादतोमेहमानबुरालगताहै
फिरबताऍंगेगुज़रजानेदोपूरासावन
पहलीबरसातमेंसबकुछहीनयालगताहै
ज़हरकेघूँटपिएजातेहैंहँसतेहँसते
इश्क़सच्चाहोतोमहबूबख़ुदालगताहै
तूमुझेवक़्तदेकोईपरेशानीनहीं
ग़ैरकेमुँहलगाकरताहैबुरालगताहै
वर्नायेटीसनहींउठतीहमारेदिलमें
ऐसालगताहैकोईअपनाख़फ़ालगताहै
जोरहाकरताहैमतलबपेहमेशामौक़ूफ़
ऐसाइंसानमुझेसचमेंबुरालगताहै
चारा-साज़ीमेंकोईऔरनहींहैतुझसा
तेरेहाथोंमेंमुझेज़हरदवालगताहै
अपनेकिरदारसेबाहरनहींजानासोहिल
एककिरदारमेंतूसबसेजुदालगताहै
  - Sohil Barelvi
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