jo guzaara hai agar vo bhi nahin boloonunga | जो गुज़ारा है अगर वो भी नहीं बोलूँगा

  - Sohil Barelvi
जोगुज़ाराहैअगरवोभीनहींबोलूँगा
तोबतादर्दकीकैसेयेगिरहखोलूँगा
येपरिंदेयेशजरबाँटरहेदुखअपना
सोचताहूँकिज़रादेरकभीसोलूँगा
मेरेपहलूमेंमिरीज़िंदगीबैठीहैअभी
सब्ररखमौततिरेसाथमेंभीहोलूँगा
फिरकिसीरोज़कोईलूटकेलेजाएगा
फिरकिसीरोज़बहुतदेरसेमैंबोलूँगा
येजोदीवार-ए-बदनपरहैंलहूकेछींटे
इससेपहलेकोईदेखेमैंइन्हेंधोलूँगा
यादआतेंहैंबहुतलोगमुझेरातोंको
यादजबकोईनहींआएगातोसोलूँगा
तेराग़मबाँटनाहैमुझकोगलेसेलगजा
अपनीतकलीफ़पेआरामसेमैंरोलूँगा
जैसेख़ामोशहूँआगेभीरहूँगाख़ामोश
कोईबोलेगामुझेकुछमैंतभीबोलूँगा
  - Sohil Barelvi
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