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Sohil Barelvi
apna matlab nikaalne waale
apna matlab nikaalne waale | अपना मतलब निकालने वाले
- Sohil Barelvi
अपना
मतलब
निकालने
वाले
मेरी
तकलीफ़
से
हैं
बेगाने
इस
दफ़ा
क्यूँँ
दिलासा
देने
लगे
ज़ख़्म
पर
फिर
नमक
छिड़क
देते
हाए
वो
इंतिज़ार
की
घड़ियाँ
आँख
अटकी
रही
दरीचे
से
मुझ
को
हैरत
में
डाल
देते
हैं
मुझ
को
हैरत
से
देखने
वाले
आँख
में
रौशनी
अगर
बचती
तेरी
तस्वीर
देख
ही
लेते
तुम
अगर
देखते
पलट
कर
तो
दौड़
कर
ट्रेन
को
पकड़
लेते
ख़ुद
को
पहचानना
पड़ा
भारी
ख़ुद
को
भूले
हैं
आपसे
मिल
के
ख़ैर
इतना
तो
कर
ही
सकता
हूँ
जान
दे
दूँगा
अश्क
के
बदले
आज
के
दौर
में
मियाँ
सोहिल
लोग
मिलते
हैं
दिल
नहीं
मिलते
- Sohil Barelvi
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यही
हसरत
लिए
फिरता
हूँ
अक्सर
कोई
मेरे
भी
दिल
की
बात
सुन
ले
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तुझ
को
तेरी
ख़ुशी
की
ख़ातिर
ही
मैं
ने
अपने
खिलाफ़
भड़काया
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पहली
बार
ही
ख़ातिर-दारी
होती
है
फिर
मेहमान
कोई
मेहमान
नहीं
रहता
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रहनुमाओं
हाथ
मेरा
था
में
रहना
आप
सब
के
साथ
चलना
चाहता
हूँ
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एक
औरत
पे
अब
अगर
रक्खे
आदमी
दूसरी
नज़र
रक्खे
मेरे
जाने
के
बाद
क्या
मालूम
तेरे
पहलू
में
कौन
सर
रक्खे
टूटना
ही
है
आख़िरश
इक
दिन
कोई
कितना
बड़ा
जिगर
रक्खे
इतना
बीमार
था
कि
डॉक्टर
ने
हाथ
रक्खे
तो
शर्त
पर
रक्खे
फिर
डराना
अगर
डरा
पाओ
अपने
दिल
में
भी
कोई
डर
रक्खे
इनकी
क़ीमत
तुझे
नहीं
मालूम
ये
जो
मोती
हैं
आँख
पर
रक्खे
कोई
गर
इश्क़
की
तरफ़
जाए
अपने
दिल
की
भी
कुछ
ख़बर
रक्खे
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Sohil Barelvi
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