aakhirsh ham faqat haath malte rahe | आख़िरश हम फ़क़त हाथ मलते रहे

  - Sohil Barelvi
आख़िरशहमफ़क़तहाथमलतेरहे
प्यारकेनामपरलोगछलतेरहे
दिन-ब-दिनइश्क़कारंगफीकापड़ा
दिन-ब-दिनयारकेवादेटलतेरहे
आगेपीछेकोईजबअपनेरहा
गोदमेंदर्दकीफूलेफलतेरहे
चोटगहरीलगीअबलगीसोलगी
इकदफ़ाबसगिरेफिरसँभलतेरहे
बादमेंख़ाकमेंसबकेसबमिलगए
इश्क़कीआगमेंजोभीजलतेरहे
छोड़करइश्क़कोऔरभीकामथे
तेरीगलियोंमेंयूँँहीटहलतेरहे
ज़ख़्म-ए-दिलकाकोईजबचाराहुआ
दर्दबढ़तागयारोगपलतेरहे
इसदिवालीभी'सोहिल'हुआफिरवही
आरज़ूबुझगईदीपजलतेरहे
  - Sohil Barelvi
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