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Sohil Barelvi
aakhirsh door ho hi jaate hain
aakhirsh door ho hi jaate hain | आख़िरश दूर हो ही जाते हैं
- Sohil Barelvi
आख़िरश
दूर
हो
ही
जाते
हैं
मेरे
दिल
को
जो
लोग
भाते
हैं
लौट
कर
मय-कदे
से
दीवाने
तेरी
आँखों
में
डूब
जाते
हैं
हम
से
वा'दा
भी
इक
नहीं
टूटा
लोग
तो
तारे
तोड़
लाते
हैं
मुझ
से
कमज़ोर
पर
सितम
कर
के
लोग
क़िस्मत
को
आज़माते
हैं
मेरे
हिस्से
में
कुछ
नहीं
सोहिल
मेरे
हिस्से
का
लोग
खाते
हैं
रोज़
दरिया
में
डाल
कर
माचिस
अपने
घर
को
मियाँ
बचाते
हैं
हम
भी
रातों
को
जाग
कर
सोहिल
'मीर'
के
शे'र
गुनगुनाते
हैं
- Sohil Barelvi
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मल्लाहों
को
इल्ज़ाम
न
दो
तुम
साहिल
वाले
क्या
जानो
ये
तूफ़ाँ
कौन
उठाता
है
ये
कश्ती
कौन
डुबोता
है
Hafeez Jalandhari
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गर
डूबना
ही
अपना
मुक़द्दर
है
तो
सुनो
डूबेंगे
हम
ज़रूर
मगर
नाख़ुदा
के
साथ
Kaifi Azmi
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इस
नदी
की
धार
में
ठंडी
हवा
आती
तो
है
नाव
जर्जर
ही
सही,
लहरों
से
टकराती
तो
है
Dushyant Kumar
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उन
आँखों
पर
शे'र
कहे
जा
सकते
थे
उन
आँखों
में
डूब
ने
से
गर
बच
जाते
Shadab Asghar
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इतने
गहरे
उतर
गया
हूँ
दरिया-ए-दर्द-ए-दिल
में
हाथ
पकड़
कर
खींच
ले
वरना
डूब
के
भी
मर
सकता
हूँ
कट्टे
ख़ंजर
रस्सी
माचिस
कुछ
दिन
मुझ
सेे
दूर
रखो
कुछ
करने
से
चूक
गया
हूँ
मैं
कुछ
भी
कर
सकता
हूँ
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Vashu Pandey
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चढ़ते
हुवे
ए
शम्स
दिखा
ताव
भी
मगर
ये
जान
ले
कि
शाम
ढले
डूब
जाएगा
Afzal Ali Afzal
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वो
जो
प्यासा
लगता
था
सैलाब-ज़दा
था
पानी
पानी
कहते
कहते
डूब
गया
है
Aanis Moin
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जो
उस
तरफ़
से
इशारा
कभी
किया
उस
ने
मैं
डूब
जाऊंगा
दरिया
को
पार
करते
हुए
Ghulam Murtaza Rahi
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कम
अज़
कम
इक
ज़माना
चाहता
हूँ
कि
तुम
को
भूल
जाना
चाहता
हूँ
ख़ुदारा
मुझ
को
तन्हा
छोड़
दीजे
मैं
खुल
कर
मुस्कुराना
चाहता
हूँ
सरासर
आप
हूँ
मद्दे
मुक़ाबिल
ख़ुदी
ख़ुद
को
हराना
चाहता
हूँ
मेरे
हक़
में
उरूस-ए-शब
है
मक़्तल
सो
उस
से
लब
मिलाना
चाहता
हूँ
ये
आलम
है,
कि
अपने
ही
लहू
में
सरासर
डूब
जाना
चाहता
हूँ
सुना
है
तोड़ते
हो
दिल
सभों
का
सो
तुम
से
दिल
लगाना
चाहता
हूँ
उसी
बज़्म-ए-तरब
की
आरज़ू
है
वही
मंज़र
पुराना
चाहता
हूँ
नज़र
से
तीर
फैंको
हो,
सो
मैं
भी
जिगर
पर
तीर
खाना
चाहता
हूँ
चराग़ों
को
पयाम-ए-ख़ामुशी
दे
तेरे
नज़दीक
आना
चाहता
हूँ
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Kazim Rizvi
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ज़माने
पहले
जिसे
डूबना
था
डूब
गया
न
जाने
अब
यहाँ
किसको
बचाने
आता
हूँ
Shariq Kaifi
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मुझ
को
जब
भी
मिली
ख़ुशी
सोहिल
छीन
कर
चल
दी
बे-दिली
सोहिल
तंग
जब
करती
ज़िंदगी
सोहिल
जी
में
आती
है
ख़ुद-कुशी
सोहिल
जब
से
कुछ
लोग
इस
जहाँ
से
गए
मेरी
दुनिया
उजड़
गई
सोहिल
देखा
जलता
हुआ
मकाँ
जब
से
मैं
ने
देखी
न
रौशनी
सोहिल
मुझ
से
तन्हाई
में
लिपट
जाए
अब
उदासी
ख़ुशी
ख़ुशी
सोहिल
ख़ूब-सूरत
नहीं
किसी
सूरत
मैं
ने
दुनिया
भी
देख
ली
सोहिल
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Sohil Barelvi
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कोई
उम्मीद
तो
न
थी
लेकिन
एक
रिश्ता
बचा
लिया
मैं
ने
Sohil Barelvi
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टूटे
ख़्वाबों
का
आशियाना
है
और
कुछ
भी
नहीं
है
ये
दुनिया
Sohil Barelvi
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मुझे
इक
पल
यही
जीने
न
देगा
अगर
कमज़ोर
पड़
जाऊँ
जहाँ
से
Sohil Barelvi
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मौत
आसान
है
बहुत
मेरी
दर्द
देता
है
रास्ते
मुझ
को
Sohil Barelvi
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