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Dev "Mustajab"
kya kaha vo kuchh bikhar gaya
kya kaha vo kuchh bikhar gaya | क्या कहा वो कुछ बिखर गया
- Dev "Mustajab"
क्या
कहा
वो
कुछ
बिखर
गया
इक
मलूल
लड़का
मर
गया
जीते
जी
तो
तन्हा
ही
रहा
और
चल
बसा
तो
भर
गया
एतिबार
था
ये
इश्क़
पर
जो
कहा
मुझे
मैं
कर
गया
था
मिरे
क़रीब
एक
ग़म
'देव'
ये
ग़म
अब
किधर
गया
- Dev "Mustajab"
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बच
निकल
आई
अब
रौशनी
जाल
से
चल
बसा
आदमी
अब
ये
जंजाल
से
है
कुशादा
ये
दिल
आँख
भी
नम
सी
है
बच
सको
तो
बचो
अब
इसी
हाल
से
देख
ये
मुड़
गया
राह
से
इश्क़
का
है
सही
बस
फ़ना
होना
इस
चाल
से
था
इरादा
उसे
रोक
लेते
मगर
कर
दिया
फिर
जुदा
चूम
कर
गाल
से
मतलबी
है
यहाँ
हर
कोई
'मुस्तजब'
भागना
ठीक
है
इन
के
अफ़ज़ाल
से
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Dev "Mustajab"
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था
इरादा
उसे
रोक
लेते
मगर
कर
दिया
फिर
जुदा
चूम
कर
गाल
से
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बे-वफ़ाई
से
तिरी
सीखा
ये
मैंने
भी
हस्ती
हस्ती
सी
कुशादा
आँखों
से
रोना
Dev "Mustajab"
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