hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
Dev "Mustajab"
Bach nikal aayi ab raushani jaal se
बच निकल आई अब रौशनी जाल से
- Dev "Mustajab"
बच
निकल
आई
अब
रौशनी
जाल
से
चल
बसा
आदमी
अब
ये
जंजाल
से
है
कुशादा
ये
दिल
आँख
भी
नम
सी
है
बच
सको
तो
बचो
अब
इसी
हाल
से
देख
ये
मुड़
गया
राह
से
इश्क़
का
है
सही
बस
फ़ना
होना
इस
चाल
से
था
इरादा
उसे
रोक
लेते
मगर
कर
दिया
फिर
जुदा
चूम
कर
गाल
से
मतलबी
है
यहाँ
हर
कोई
'मुस्तजब'
भागना
ठीक
है
इन
के
अफ़ज़ाल
से
- Dev "Mustajab"
Download Ghazal Image
बे-वफ़ाई
से
तिरी
सीखा
ये
मैंने
भी
हस्ती
हस्ती
सी
कुशादा
आँखों
से
रोना
Dev "Mustajab"
Send
Download Image
2 Likes
क्या
कहा
वो
कुछ
बिखर
गया
इक
मलूल
लड़का
मर
गया
जीते
जी
तो
तन्हा
ही
रहा
और
चल
बसा
तो
भर
गया
एतिबार
था
ये
इश्क़
पर
जो
कहा
मुझे
मैं
कर
गया
था
मिरे
क़रीब
एक
ग़म
'देव'
ये
ग़म
अब
किधर
गया
Read Full
Dev "Mustajab"
Download Image
2 Likes
था
इरादा
उसे
रोक
लेते
मगर
कर
दिया
फिर
जुदा
चूम
कर
गाल
से
Dev "Mustajab"
Send
Download Image
1 Like
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Baarish Shayari
Valentine Shayari
Qabr Shayari
I love you Shayari
Emotional Shayari