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Simar Gozra
saath nahin hai isi
saath nahin hai isi | साथ नहीं है इसीलिए हम होश में हैं
- Simar Gozra
साथ
नहीं
है
इसीलिए
हम
होश
में
हैं
वो
साथ
होता
तो
हम
हैरत
में
होते
- Simar Gozra
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इक
रिश्ते
के
धागे
टूटे
मंज़िल
टूटी
रस्ते
टूटे
उसने
मुझ
सेे
रिश्ता
जोड़ा
उसके
सारे
रिश्ते
टूटे
इश्क़
तो
फिर
भी
होगा
हमको
बिखरे
बिगड़े
चाहे
टूटे
ये
सब
शा'इरी
सुनने
वाले
ये
भी
कहीं
से
होंगे
टूटे
ऑंखें
खुल
गई
देख
के
उसको
और
किसी
के
चश्में
टूटे
तू
क्या
मेरे
सामने
आया
मेरे
लुक़्में
लहजे
टूटे
वो
भी
हमारा
हो
के
टूटा
हम
भी
उसके
होके
टूटे
टूटे
दिल
का
दर्द
है
ऐसा
जैसे
अंदर
शीशे
टूटे
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Simar Gozra
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थोड़ा
नहीं
सारे
का
सारा
टूटा
है
मेरे
दिल
तक
पूरा
रस्ता
टूटा
है
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दिल
में
मेरे
ये
डर
सा
उठा
है
वो
मेरे
शहर
में
आ
चुका
है
मुझको
कोई
तो
घर
छोड़
आओ
जिसको
भी
मेरे
घर
का
पता
है
मैं
उसे
अब
कहा
ढूँढूँ
जो
वो
मेरे
भीतर
कहीं
तो
छुपा
है
अब
फ़क़त
राख
होना
है
बाक़ी
आग
तो
वो
लगा
ही
चुका
है
कौन
से
मुँह
उसे
मिलने
जाऊँ
उसके
घर
आगे
शीशा
लगा
है
हम
कहा
थे
कहाँ
आ
चुके
हैं
वो
कहाँ
था
कहाँ
जा
चुका
है
दूर
से
तुम
नहीं
दिख
रहे
और
वैसे
भी
मुझको
चश्मा
लगा
है
किसको
किसको
मनाऊँ
मैं
जो
अब
हर
कोई
मुझ
सेे
यूँँ
ही
ख़फ़ा
है
सारे
'आशिक़
यहाँ
मरते
हैं
वो
उसका
दिल
ऐसा
दश्त-ए-वगा
है
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Simar Gozra
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हमारे
बीच
गर
झगड़े
रहेंगे
तो
उस
सेे
फ़ासले
बढ़ते
रहेंगे
वो
हमको
देख
के
हँसता
रहेगा
हम
उसको
देख
के
रोते
रहेंगे
न
है
शौक़-ओ-तमन्ना
कुछ
भी
फिर
भी
हम
उसकी
ग़ज़लों
को
पढ़ते
रहेंगे
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Simar Gozra
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जैसे
ख़ुद
ही
पेड़
गिरा
हो
आरे
पर
हम
सेे
क़ाबू
हुआ
न
अपने
ग़ुस्से
पर
मैं
हूँ
जो
हूँ
ख़ाली
पड़ा
हूँ
कमरे
में
बर्तन
हैं
जो
ख़ाली
पड़े
हैं
चूल्हे
पर
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