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Simar Gozra
ham vo daulat jo kaase men nahin aate
ham vo daulat jo kaase men nahin aate | हम वो दौलत जो कासे में नहीं आते
- Simar Gozra
हम
वो
दौलत
जो
कासे
में
नहीं
आते
ये
किरदार
इतने
सस्ते
में
नहीं
आते
हुस्न
कभी
हमको
क़ैदी
नहीं
कर
सकता
हम
वो
परिंदे
जो
पिंजरे
में
नहीं
आते
- Simar Gozra
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हमारे
बीच
गर
झगड़े
रहेंगे
तो
उस
सेे
फ़ासले
बढ़ते
रहेंगे
वो
हमको
देख
के
हँसता
रहेगा
हम
उसको
देख
के
रोते
रहेंगे
न
है
शौक़-ओ-तमन्ना
कुछ
भी
फिर
भी
हम
उसकी
ग़ज़लों
को
पढ़ते
रहेंगे
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Simar Gozra
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ज़िंदगी
से
यही
शिकायत
है
अपनी
ही
जान
से
फ़िराक़त
है
ख़ुद
ख़ुदा
भी
हसीन
ही
होगा
उसका
बंदा
जो
ख़ूब-सूरत
है
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Simar Gozra
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वही
तो
दिन
था
जब
था
छोड़ा
उसने
फिर
मनाया
तब
से
मैंने
जन्मदिन
नहीं
Simar Gozra
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मरे
पड़े
थे
वैसे
भी
हालात
से
हम
तुमको
भी
तो
खो
बैठे
थे
हाथ
से
हम
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अपना
सा
है
ये
लग
रहा
कोई
मेरी
आँखों
में
हादसा
कोई
अब
मेरे
पास
मेरा
कुछ
भी
नहीं
जाँ
थी
इक
वो
भी
ले
गया
कोई
देख
ये
ज़ख़्मों
से
भरे
हुए
हाथ
कभी
इनको
था
चूमता
कोई
सज़ा
भी
हमको
रात
की
ही
हुई
चैन
से
कैसे
काटता
कोई
कही
रख
कर
मैं
ख़ुद
को
भूल
गया
मुझको
फिर
कैसे
ढूँढता
कोई
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Simar Gozra
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