जाओ मोहब्बतों के मकीं इस मकान से

  - Shubham Nankani
जाओमोहब्बतोंकेमकींइसमकानसे
ख़र्चानहींनिकलरहाअहद-ए-ज़ुबानसे
कश्तीजोडूबनेकोहैअपनीथकानसे
आख़िरतलकवोलड़रहीथीख़ानदानसे
इसशाख़पेजोफूलथेजादूगरीसेक़ब्ल
कुछतितलियाँवोलेउड़ींतेरेबयानसे
जिसतरहमेरेज़िक्रपेकुछढूँढतेहोतुम
रुख़्सतनहींहुआहूँअभीदरमियानसे
किसतैशमेंगिरादिएमैंनेसभीदरख़्त
क्यारातकाटलूँगामैंतीर-ओ-कमानसे
  - Shubham Nankani
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