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Ramnath Shodharthi
ho ga.e hote bahut pahle hi ham daulat-mand
ho ga.e hote bahut pahle hi ham daulat-mand | हो गए होते बहुत पहले ही हम दौलत-मंद
- Ramnath Shodharthi
हो
गए
होते
बहुत
पहले
ही
हम
दौलत-मंद
दौलत-ए-इल्म
से
बस
इल्म
हटाना
था
हमें
- Ramnath Shodharthi
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दर्द
सहने
का
हुनर
तो
पास
सबके
है
मगर
दर्द
कहने
का
हुनर
बस
शायरों
के
पास
है
Divy Kamaldhwaj
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हमें
पढ़ाओ
न
रिश्तों
की
कोई
और
किताब
पढ़ी
है
बाप
के
चेहरे
की
झुर्रियाँ
हम
ने
Meraj Faizabadi
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रक़ीब
आकर
बताते
हैं
यहाँ
तिल
है
वहाँ
तिल
है
हमें
ये
जानकारी
थी
मियाँ
पहले
बहुत
पहले
Anand Raj Singh
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बस
यही
इक
हुनर
सीखना
है
मुझे
वो
मिरी
चुप्पी
कैसे
पढ़ा
करती
है
Harsh saxena
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ये
नदी
वर्ना
तो
कब
की
पार
थी
मेरे
रस्ते
में
अना
दीवार
थी
आप
को
क्या
इल्म
है
इस
बात
का
ज़िंदगी
मुश्किल
नहीं
दुश्वार
थी
थीं
कमानें
दुश्मनों
के
हाथ
में
और
मेरे
हाथ
में
तलवार
थी
जल
गए
इक
रोज़
सूरज
से
चराग़
रौशनी
को
रौशनी
दरकार
थी
आज
दुनिया
के
लबों
पर
मुहर
है
कल
तलक
हाँ
साहब-ए-गुफ़्तार
थी
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ARahman Ansari
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किताबें
खोल
कर
बैठे
हैं
लेकिन
रिवीजन
बस
तुम्हारा
हो
रहा
है
Prateek Shukla
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तमाम
होश
ज़ब्त
इल्म
मस्लहत
के
बाद
भी
फिर
इक
ख़ता
मैं
कर
गया
था
माज़रत
के
बाद
भी
Pallav Mishra
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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इक
और
किताब
ख़त्म
की
फिर
उस
को
फाड़
कर
काग़ज़
का
इक
जहाज़
बनाया
ख़ुशी
हुई
Ameer Imam
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लोग
हम
सेे
सीखते
हैं
ग़म
छुपाने
का
हुनर
आओ
तुमको
भी
सिखा
दें
मुस्कुराने
का
हुनर
क्या
ग़ज़ब
है
तजरबे
की
भेंट
तुम
ही
चढ़
गए
तुम
से
ही
सीखा
था
हमने
दिल
दुखाने
का
हुनर
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Kashif Sayyed
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दुनिया
बे-रंग
हुई
जाती
है
रफ़्ता-रफ़्ता
रफ़्ता-रफ़्ता
कोई
रंगीन
हुआ
जाता
है
Ramnath Shodharthi
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चीख़ती
रहती
है
दुनिया
कि
बचाओ!
पर
मैं
'पूस
की
रात'
के
हल्कू-सा
पड़ा
रहता
हूँ
Ramnath Shodharthi
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तीन
शर्तें
हैं
बस
इंसान
यहाँ
होने
की
और
मफ़्हूम
है
तीनों
का
मुहब्बत
करिए
Ramnath Shodharthi
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गुमाँ
मत
कर
कि
है
तेरी
बदौलत
रौनक़े-महफ़िल
ग़ज़ल
वालो
यहाँ
हम
हैं
तो
ये
बाज़ार
चलता
है
Ramnath Shodharthi
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हर
एक
संग
को
झुक
कर
सलाम
करते
हैं
आप
मेरे
अज़ीज़!
ये
तो
हद
है
बुत-परस्ती
की
Ramnath Shodharthi
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