shaakh | “शाख़”

  - Shivang Tiwari
“शाख़”
एकज़र्दसीशाख़राखकरजारहाहूँतेरेलिए
जबइसशाख़परफूलखिलजाएँगे
औरज़िंदगीकीरेखासब्ज़-रंगहोगी
तबमैंनहींरहूँगामगरतुम्हेंयेमहसूसहोगा
कियेमेरीहीख़ुश्बूहैमेराहीहैयेरंग-ए-बहार
मिट्टीबग़ैरपानीबग़ैरज़िंदारहेगीयेशाख़
येकभीहुआकरतीथीमेरीरूहकेशजरकीआँख
आँखोंकोदिखाईदेऐसीबारिशकीज़रूरतनहींइसे
इसकीइकउम्रगुज़रचुकीहैधूपमेंउड़ातेहुएख़ाक
येशाख़किसीशाहीफूलोंकीनहींहैबिल्कुल
मगरइतनीभीबेकारनहींकीइसपेकोईफूलहीआए
हरएकचीज़केलिएचाहिएहोताहैएकवक़्त
औरबसइसीचीज़कीकमीथीहमदोनोंकीज़िंदगीमेंफ़क़त
अपनीसारीहयातबीतगईबादलोंकीपरछाइयाँगिननेमें
किसीनेअगरपूछातुमसेतोबेशक़कहना
कभीकभीऐसेबेकारकामभीकरनेज़रूरीहैं
अपनेहीरूहकेछालेकभीसिलनेमेंकभीछिलनेमें
सचकहूँतोहरी-भरीहीशाख़देनीथीतुम्हेंमगर
येपताथाकीख़्वाहिशोंसेज़्यादासाँसेकमपड़जाएगी
मगरठीकहैअबजोहुआसोहुआ,अबतोतुम्हें,
बहारऔरपतझड़कीबहुतअच्छेसेसमझआएगी
इसशाख़कीपोरोंमेंअपनीकुछपरछाइयाँरखदीहैंमैंने
जैसेसुकूत-ए-ज़िंदगीमेंदिलकीकुछबे-ताबियाँरखदीहैंमैंने
कहींऐसाहोकिमैंदूरख़ुदअपनेआपसेहोजाऊँ
मेरीहस्तीकेहंगामोंमेंकुछतन्हाइयाँरखदीहैंमैंने
मेरेशाहकारमेरेअफ़्कारहोजाएँफ़र्सूदाज़मानेमें
इसलिएनिगाहोंमेंतुम्हारीकुछगहराइयाँरखदीहैंमैंने
मेराहरइज़्तिराब-ए-दिलनिशाँमंज़िलकाबनजाए
तमन्नाओंमेंतेरीहिज्रकीअंगड़ाइयाँरखदीहैंमैंने
किसीभीग़ैरकीजा़निबनज़रनहींउठेगीमेरी
मेरीनिगाहोंमेंतुम्हारीसबरानाइयाँरखदीहैंमैंने
  - Shivang Tiwari
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