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Shivam Raahi Badayuni
yahaañ log baithe hain nuksaan karke
yahaañ log baithe hain nuksaan karke | यहाँ लोग बैठे हैं नुकसान करके
- Shivam Raahi Badayuni
यहाँ
लोग
बैठे
हैं
नुकसान
करके
कहाँ
आ
गए
बस्ती
वीरान
करके
सभी
को
ये
मैं
बात
जाकर
बताता
यही
इश्क़
धोका
है
ऐलान
करके
उदासी
हमारे
बदन
के
है
अंदर
कहाँ
अब
गई
रूह
बे-ध्यान
करके
मिरा
कौन
था
इक
तुम्हारे
सिवा
जो
मुझे
तुम
गए
ऐसे
अंजान
करके
भली
कट
रही
थी
उदासी
में
अपनी
गए
ज़िंदगी
क्यूँ
ये
आसान
करके
मिरे
ज़ख़्म
देखा
तो
बोला
है
अब
वो
मुझे
मौत
लगती
है
पहचान
करके
मोहब्बत
नहीं
थी
उन्हें
तुम
सेे
'राही'
गए
हैं
जो
बस
मुझको
बे-जान
करके
- Shivam Raahi Badayuni
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किया
बादलों
में
सफ़र
ज़िंदगी
भर
ज़मीं
पर
बनाया
न
घर
ज़िंदगी
भर
सभी
ज़िंदगी
के
मज़े
लूटते
हैं
न
आया
हमें
ये
हुनर
ज़िंदगी
भर
मोहब्बत
रही
चार
दिन
ज़िंदगी
में
रहा
चार
दिन
का
असर
ज़िंदगी
भर
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Anwar Shaoor
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तुम्हें
भी
साँस
लेने
की
कमी
हो
तुम्हें
भी
ज़िंदगी
ठुकरा
के
जाए
Ambar
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ज़िंदगी
भर
के
लिए
दिल
पे
निशानी
पड़
जाए
बात
ऐसी
न
लिखो,
लिख
के
मिटानी
पड़
जाए
Aadil Rasheed
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एक
ही
नदी
के
हैं
ये
दो
किनारे
दोस्तो
दोस्ताना
ज़िंदगी
से
मौत
से
यारी
रखो
Rahat Indori
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जान
भी
अब
दिल
पे
वारी
जाएगी
ये
बला
सर
से
उतारी
जाएगी
एक
पल
तुझ
बिन
गुज़रना
है
कठिन
ज़िन्दगी
कैसे
गुज़ारी
जाएगी
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Anjum Rehbar
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ज़िंदगी
में
आई
वो
जैसे
मेरी
तक़दीर
हो
और
उसी
तक़दीर
से
फिर
चोट
खाना
याद
है
Rohit tewatia 'Ishq'
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तुम
भी
साबित
हुए
कमज़ोर
मुनव्वर
राना
ज़िन्दगी
माँगी
भी
तुमने
तो
दवा
से
माँगी
Munawwar Rana
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किराए
के
घर
में
गई
ज़िन्दगी
कहाँ
ज़िन्दगी
में
रही
ज़िन्दगी
Umesh Maurya
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मुझे
ख़बर
नहीं
ग़म
क्या
है
और
ख़ुशी
क्या
है
ये
ज़िंदगी
की
है
सूरत
तो
ज़िंदगी
क्या
है
Ahsan Marahravi
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पहेली
ज़िंदगी
की
कब
तू
ऐ
नादान
समझेगा
बहुत
दुश्वारियाँ
होंगी
अगर
आसान
समझेगा
Zubair Ali Tabish
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एक
तरफ़
है
ये
दिल
भी
ख़ंजर
है
एक
तरफ़
ज़ख़्म
हज़ारों
हैं
मुझ
में
कि
असर
है
एक
तरफ़
इस
ख़ाली
जंगल
में
किस
से
रस्ता
पूछूॅं
मैं
सारे
जंगल
उजड़े
उजड़े
घर
है
एक
तरफ़
कौन
भला
जाकर
सहरा
की
प्यास
बुझाएगा
सूखे
हैं
सब
दरिया
भी
सागर
है
एक
तरफ़
कौन
परिंदों
की
ख़ातिर
ये
बोझ
उठाएगा
सारे
जंगल
ख़ाक
हुए
है
शजर
है
एक
तरफ़
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Shivam Raahi Badayuni
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चेहरे
पे
ऐसी
अब
उदासी
कोई
होनी
चाहिए
ऐसी
उदासी
उम्र
भर
मुझ
में
ही
खोनी
चाहिए
कोई
ग़म-ए-दिल
से
परेशाँ
है
कोई
उम्मीद
से
हो
कोई
ऐसी
ज़िंदगी
मुझ
में
ही
रोनी
चाहिए
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Shivam Raahi Badayuni
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आप
के
बुलाने
पर
और
कौन
आएगा
ज़ख़्म
ये
दिखाने
पर
और
कौन
आएगा
जिस
तरह
मोहब्बत
ये
लोगों
तक
में
पहुँची
है
अब
के
उस
निशाने
पर
और
कौन
आएगा
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Shivam Raahi Badayuni
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ग़म-ए-दिल
की
दवा
देना
मुझे
लोगों
अगर
दिल
हो
जला
देना
मुझे
लोगों
मुझे
अब
बद-दुआओं
की
ज़रूरत
है
सभी
मिल
के
दु'आ
देना
मुझे
लोगों
अभी
है
वक़्त
बाक़ी
मौत
आने
में
अगर
आए
उठा
देना
मुझे
लोगों
नया
घर
हूँ
ज़रा
बनने
मुझे
तुम
दो
बना
बंज़र
गिरा
देना
मुझे
लोगों
नहीं
है
वक़्त
जब
बाक़ी
मिरा
लोगों
सभी
मिल
के
जला
देना
मुझे
लोगों
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Shivam Raahi Badayuni
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ज़िंदगी
जिस
दिन
मिरी
तू
जान
लेता
बात
मेरी
तू
उसी
दिन
मान
लेता
डूबते
आख़िर
नहीं
वो
सब
हमारे
तब
अगर
गहराई
मेरी
जान
लेता
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Shivam Raahi Badayuni
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