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Shivam Raahi Badayuni
sabhi zakham unke chhupaate rahenge
sabhi zakham unke chhupaate rahenge | सभी ज़ख़्म उनके छुपाते रहेंगे
- Shivam Raahi Badayuni
सभी
ज़ख़्म
उनके
छुपाते
रहेंगे
यही
ग़म
हमें
अब
सताते
रहेंगे
भरे
ज़ख़्म
कहते
रहें
चीख़
करके
इन्हें
फूल
कब
तक
बताते
रहेंगे
हमें
ज़िंदगी
से
शिकायत
नहीं
है
यही
बात
ख़ुद
को
सुनाते
रहेंगे
मिरे
पास
कुछ
भी
बचा
ही
नहीं
है
बचे
ख़्वाब
तेरे
जलाते
रहेंगे
- Shivam Raahi Badayuni
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फूलों
की
सेज
पर
ज़रा
आराम
क्या
किया
उस
गुल-बदन
पे
नक़्श
उठ
आए
गुलाब
के
Adil Mansuri
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कुछ
तो
हवा
भी
सर्द
थी
कुछ
था
तिरा
ख़याल
भी
दिल
को
ख़ुशी
के
साथ
साथ
होता
रहा
मलाल
भी
Parveen Shakir
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फिर
नज़र
में
फूल
महके
दिल
में
फिर
शमएँ
जलीं
फिर
तसव्वुर
ने
लिया
उस
बज़्म
में
जाने
का
नाम
Faiz Ahmad Faiz
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तू
किसी
और
ही
दुनिया
में
मिली
थी
मुझ
सेे
तू
किसी
और
ही
मौसम
की
महक
लाई
थी
डर
रहा
था
कि
कहीं
ज़ख़्म
न
भर
जाएँ
मेरे
और
तू
मुट्ठियाँ
भर-भर
के
नमक
लाई
थी
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Tehzeeb Hafi
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हम
उनके
निकाले
हुए
लोगों
में
हैं
शामिल
हर
हाल
में
जीने
का
सलीक़ा
हमें
मालूम
वो
फूल
जो
तोड़े
गए
इज़हार
की
ख़ातिर
आते
हुए
किस
किस
ने
है
रौंदा
हमें
मालूम
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Amrendra Vishwakarma
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वैसे
वो
इक
फूल
है
मुझको
भाता
है
पर
ग़ुस्से
में
पत्थर
का
हो
जाता
है
Vishal Singh Tabish
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ये
जिस्म
तंग
है
सीने
में
भी
लहू
कम
है
दिल
अब
वो
फूल
है
जिस
में
कि
रंग-ओ-बू
कम
है
Pallav Mishra
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मिरे
ही
वास्ते
लाया
है
दोनो
फूल
और
ख़ंजर
मुझे
ये
देखना
है
बस
वो
पहले
क्या
उठाता
है
Parul Singh "Noor"
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मैं
अपनी
हिजरत
का
हाल
लगभग
बता
चुका
था
सभी
को
और
बस
तिरे
मोहल्ले
के
सारे
लड़के
हवा
बनाने
में
लग
गए
थे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम
सेे
जो
मिला
हूँ
तो
मेरा
हाल
है
बदला
पतझड़
में
भी
जैसे
के
कोई
फूल
खिला
हो
Haider Khan
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एक
तरफ़
है
ये
दिल
भी
ख़ंजर
है
एक
तरफ़
ज़ख़्म
हज़ारों
हैं
मुझ
में
कि
असर
है
एक
तरफ़
इस
ख़ाली
जंगल
में
किस
से
रस्ता
पूछूॅं
मैं
सारे
जंगल
उजड़े
उजड़े
घर
है
एक
तरफ़
कौन
भला
जाकर
सहरा
की
प्यास
बुझाएगा
सूखे
हैं
सब
दरिया
भी
सागर
है
एक
तरफ़
कौन
परिंदों
की
ख़ातिर
ये
बोझ
उठाएगा
सारे
जंगल
ख़ाक
हुए
है
शजर
है
एक
तरफ़
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Shivam Raahi Badayuni
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मेरी
रातें
मुझको
सोने
को
कहती
है
उसकी
यादें
मुझको
खोने
को
कहती
हैं
Shivam Raahi Badayuni
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बनाने
में
जिसको
ज़माने
लगे
वहीं
आज
घर
क्यूँँ
पुराने
लगे
कभी
कोई
रोता
नहीं
ठीक
से
सभी
लोग
आँसू
छुपाने
लगे
हमें
टूट
कर
थी
मोहब्बत
मगर
ये
कहने
में
तुम
सेे
जमाने
लगे
हमें
देख
कर
लोग
जीते
थे
जो
वहीं
लोग
हमको
भुलाने
लगे
ज़रा
देर
बैठा
हुआ
था
उदास
मुझे
दोस्त
आकर
हँसाने
लगे
हमीं
ने
दिया
था
ठिकाना
जिन्हें
हमीं
को
ठिकाने
लगाने
लगे
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Shivam Raahi Badayuni
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मोहब्बत
आपसे
करने
में
अब
घबरा
रहे
हैं
हम
भला
कैसे
ये
आख़िर
दर्द
को
अपना
रहे
हैं
हम
जिसे
अब
रात
दिन
ही
देखते
थे
बाहों
में
अपनी
उसी
से
ख़ैर
अब
मिलने
में
क्यूँ
शर्मा
रहे
हैं
हम
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Shivam Raahi Badayuni
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और
फिर
तय
ये
हुआ
चेहरा
नहीं
देखेंगे
जाने
वालों
का
कभी
रस्ता
नहीं
देखेंगे
आज
चढ़
जा
तू
ये
ऊँचाई
कि
अब
मंज़िल
पर
कल
भला
लोग
तुझे
बढ़ता
नहीं
देखेंगे
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Shivam Raahi Badayuni
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