raat din KHud ko bhi apna ab pata kuchh bhi nahin | रात दिन ख़ुद को भी अपना अब पता कुछ भी नहीं

  - Shivam Raahi Badayuni
रातदिनख़ुदकोभीअपनाअबपताकुछभीनहीं
दिलनेचाहातोबहुतलेकिनमिलाकुछभीनहीं
बसचलेहीजारहेहैंजिसतरफ़दिखजाएवो
औरमंज़िलकाकहींअबतकपताकुछभीनहीं
उसनेदिलपरहाथरखकरपूछाक्यासबठीकहै
हमकोकहनाथाबहुतकुछपरकहाकुछभीनहीं
कौनहूँमैंऔरक्याहीचाहताहूँआपसे
मानलूँगायेकिरिश्तेमेंबचाकुछभीनहीं
लोगपागलतकहुएहैंइसमुहब्बतमेंयहाँ
आपकहतेहैंमुहब्बतमेंरखाकुछभीनहीं
हालअपनाकरलियाहैइसतरहअबआपको
देखकरमुझकोलगेगाबसहुआकुछभीनहीं
  - Shivam Raahi Badayuni
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