mujhe ik nazm likhni chahiye thii | "मुझे इक नज़्म लिखनी चाहिए थी"

  - Shehbaz Gohar
"मुझेइकनज़्मलिखनीचाहिएथी"
मुझेइकनज़्मलिखनीचाहिएथी
अस्पतालोंमेंपड़ेबीमारपुर्सोपर
मुझेदरियाबदलतीक़श्तियों
औरबंदहोतेफाटकोंपर
नज़्मलिखनीचाहिएथीऐसेलोगोंपर
जिन्हेंलिखनानहींआता
जिन्हेंरोनानहींआता
किसीअंधेभिकारीकेतआरूफ़में
औरअपनेशहरकेफूटपाथपेबिकतीदु'आओंपर
किसीउँचीइमारतपरजहाँकोईजाताहो
किसीबूढेसिपाहीपरजिसेलड़नाआताहो
किसीऔरतकेभद्देजिस्मपर
दीवारसेलटकीहुईतलवारपर
औरबंदकमरोंपर
मुझेइकनज़्मलिखनीचाहिएथीनज़्मकहतीलड़कियोंपर
सस्तेतोहफ़ोंपर
किसीमल्लाहकेदरियामेंगिरतेआँसुओंपर
औरउसमाज़ूरबच्चेपरजिसकेसाथकोईखेलताहो
मुझेइकनज़्मलिखनीचाहिएथी
  - Shehbaz Gohar
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