hi
0
Search
Shayari
Writers
Events
Blog
Store
Help
Login
By:
00:00/00:00
karan singh rajput
main bichhadkar tujhse kaise jeeoonga
main bichhadkar tujhse kaise jeeoonga | मैं बिछड़कर तुझ सेे कैसे जीऊँगा
- karan singh rajput
मैं
बिछड़कर
तुझ
सेे
कैसे
जीऊँगा
इक
यही
डर
खाए
जाता
है
मुझे
- karan singh rajput
Download Sher Image
उसे
ज़ियादा
ज़रूरत
थी
घर
बसाने
की
वो
आ
के
मेरे
दर-ओ-बाम
ले
गया
मुझ
से
Farhat Abbas Shah
Send
Download Image
31 Likes
शे'र
दर-अस्ल
हैं
वही
'हसरत'
सुनते
ही
दिल
में
जो
उतर
जाएँ
Hasrat Mohani
Send
Download Image
22 Likes
डर
हम
को
भी
लगता
है
रस्ते
के
सन्नाटे
से
लेकिन
एक
सफ़र
पर
ऐ
दिल
अब
जाना
तो
होगा
Javed Akhtar
Send
Download Image
43 Likes
मैं
बार
बार
तुझे
देखता
हूॅं
इस
डर
से
कि
पिछली
बार
का
देखा
हुआ
ख़राब
न
हो
Shaheen Abbas
Send
Download Image
36 Likes
हम
किसी
दर
पे
न
ठिटके
न
कहीं
दस्तक
दी
सैकड़ों
दर
थे
मिरी
जाँ
तिरे
दर
से
पहले
Ibn E Insha
Send
Download Image
29 Likes
ज़िंदगी
मेरी
मुझे
क़ैद
किए
देती
है
इस
को
डर
है
मैं
किसी
और
का
हो
सकता
हूँ
Azm Shakri
Send
Download Image
17 Likes
हम
वो
हैं
जो
नइँ
डरते
वक़्त
के
इम्तिहान
से
वो
परिंदे
और
थे
जो
डर
गए
आसमान
से
Madhav
Send
Download Image
19 Likes
भूचाल
की
धमकी
का
अगर
डर
है
तो
लोगों
इन
कच्चे
मकानों
को
गिरा
क्यूँ
नहीं
देते
Gyan Prakash Vivek
Send
Download Image
16 Likes
मेरे
ही
संग-ओ-ख़िश्त
से
तामीर-ए-बाम-ओ-दर
मेरे
ही
घर
को
शहर
में
शामिल
कहा
न
जाए
Majrooh Sultanpuri
Send
Download Image
22 Likes
हुस्न
ने
शौक़
के
हंगा
में
तो
देखे
थे
बहुत
इश्क़
के
दावा-ए-तक़दीस
से
डर
जाना
था
Read Full
Asrar Ul Haq Majaz
Send
Download Image
26 Likes
Read More
मुझ
सेे
ज़्यादा
जानने
वाला
तुम्हें
मिल
सकता
है
पर
मेरी
जाँ
मुझ
सेे
ज़्यादा
चाहने
वाला
नहीं
karan singh rajput
Send
Download Image
2 Likes
कि
जिसने
भी
दिया
है
अपना
सब
कुछ
उसे
सच
में
मिला
कुछ
भी
नहीं
है
karan singh rajput
Send
Download Image
0 Likes
कम
देखता
हूँ
आईने
में
चेहरा
अपना
तब
से
मैं
जब
से
कहा
है
तूने
ये
सूरत
नहीं
अच्छी
मेरी
karan singh rajput
Send
Download Image
3 Likes
बहुत
याद
आते
है
वो
लोग
जिनका
बिछड़ना
फ़क़त
हादसा
होता
है
इक
karan singh rajput
Send
Download Image
1 Like
चार
ही
दिन
थे
क्या
ज़िन्दगी
के
लिए
ना
मिला
कोई
भी
आशिक़ी
के
लिए
हाथ
आँखों
पे
धरने
लगा
चाँद
अब
एक
उस
की
ही
बेपर्दगी
के
लिए
पूजते
है
उसे
जो
कि
दिखता
नहीं
लोग
सब
करते
है
बंदगी
के
लिए
देता
है
तो
दे
इक
दो
सदी
ऐ
ख़ुदा
चार
दिन
कम
है
आवारगी
के
लिए
ना
गिला
कोई
ना
ही
शिकायत
कोई
कुछ
तो
हो
उन
सेे
नाराजगी
के
लिए
आदमी
देता
है
हर
जहाँ
को
ख़ुशी
ख़ुद
तरसता
है
इक
इक
ख़ुशी
के
लिए
दुख
भरी
ज़िन्दगी
के
सिवा
दुनिया
में
अब
बचा
ही
क्या
है
आदमी
के
लिए
Read Full
karan singh rajput
Download Image
4 Likes
Read More
Akbar Allahabadi
Krishna Bihari Noor
Shariq Kaifi
Mohammad Alvi
Anjum Rehbar
Abhishar Geeta Shukla
Ali Zaryoun
Zehra Nigaah
Amjad Islam Amjad
Asad Bhopali
Get Shayari on your Whatsapp
Phool Shayari
Bekhayali Shayari
Qatil Shayari
Murder Shayari
Ghar Shayari