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karan singh rajput
ik ped ke saa.e men kya baith gaya thak kar
ik ped ke saa.e men kya baith gaya thak kar | इक पेड़ के साए में क्या बैठ गया थक कर
- karan singh rajput
इक
पेड़
के
साए
में
क्या
बैठ
गया
थक
कर
उसने
कहा
पागल
यूँँ
आराम
नहीं
लेते
- karan singh rajput
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या'नी
कि
इश्क़
अपना
मुकम्मल
नहीं
हुआ
गर
मैं
तुम्हारे
हिज्र
में
पागल
नहीं
हुआ
वो
शख़्स
सालों
बाद
भी
कितना
हसीन
है
वो
रंग
कैनवस
पे
कभी
डल
नहीं
हुआ
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Kushal Dauneria
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दिल
भी
पागल
है
कि
उस
शख़्स
से
वाबस्ता
है
जो
किसी
और
का
होने
दे
न
अपना
रक्खे
Ahmad Faraz
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तेरी
गली
को
छोड़
के
पागल
नहीं
गया
रस्सी
तो
जल
गई
है
मगर
बल
नहीं
गया
मजनूँ
की
तरह
छोड़ा
नहीं
मैं
ने
शहर
को
या'नी
मैं
हिज्र
काटने
जंगल
नहीं
गया
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Ismail Raaz
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कभी
फूल
देखती
है
कभी
देखती
है
कलियाँ
मुझे
कर
रही
है
पागल
ये
नज़र
फिसल
फिसल
के
Ajeetendra Aazi Tamaam
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रोज़
तारों
को
नुमाइश
में
ख़लल
पड़ता
है
चाँद
पागल
है
अँधेरे
में
निकल
पड़ता
है
Rahat Indori
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दौलत
शोहरत
बीवी
बच्चे
अच्छा
घर
और
अच्छे
दोस्त
कुछ
तो
है
जो
इन
के
बाद
भी
हासिल
करना
बाक़ी
है
कभी-कभी
तो
दिल
करता
है
चलती
रेल
से
कूद
पड़ूॅं
फिर
कहता
हूॅं
पागल
अब
तो
थोड़ा
रस्ता
बाक़ी
है
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Zia Mazkoor
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अब
मेरी
बात
ये
अफ़वाह
लगेगी
लेकिन
चाहता
हूँ
मैं
तुम्हें
आज
भी
पागल
की
तरह
Pravin Rai
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ख़ुदा
ने
यह
सिफ़त
दुनिया
की
हर
औरत
को
बख़्शी
है
कि
वो
पागल
भी
हो
जाए
तो
बेटे
याद
रहते
हैं
Munawwar Rana
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दिल-ए-सोज़ाँ
को
भी
महका
रहे
हैं
हमें
जो
ख़्वाब
तेरे
आ
रहे
हैं
तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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तेरे
शैदाई
पागल
हो
चुके
हैं
तिरी
तस्वीर
चू
में
जा
रहे
हैं
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Siddharth Saaz
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इतनी
महोब्बत
के
बाद
भी
फासला
बढ़ाओगे
तुम
मतलब
मिरी
मजबूरी
का
पूरा
फायदा
उठाओगे
तुम
karan singh rajput
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हस्ते
हुए
सह
जाएँगे
हम
तेरे
ग़म
सारे
रोते
हुए
तो
इक
दिन
भी
कटने
न
पायेगा
karan singh rajput
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ये
तिरी
ख्वाइश
है
जाँ
तुझे
किसके
साथ
रहना
है
एक
तिरा
हुस्न
देखता
है
एक
तुझ
में
प्यार
देखता
है
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karan singh rajput
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किसी
से
हम
वफ़ा
करे,
हमें
वफ़ा
ही
ना
मिले
कि
बदनसीब
ऐसे
भी
नहीं,
दु'आ
ही
ना
मिले
करेगा
क्या
दिल-ए-
-
बेताब
इस
सफ़र
में
तूने
गर
सितम
उठाये
फिर
भी
यार
का
पता
ही
ना
मिले
कभी
कभी
तो
मुझको
ये
भी
डर
सताता
रहता
है
कहीं
मैं
आँख
खोलूँ
तो
मुझे
सुब्हा
ही
ना
मिले
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karan singh rajput
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यही
इक
खासियत
है
मुझ
में
शायद
कि
अपना
ग़म
छुपा
लेता
हूँ
सब
सेे
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karan singh rajput
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