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Abhay Mishra
ufaanon sa utha hai shor dil men
ufaanon sa utha hai shor dil men | उफ़ानों सा उठा है शोर दिल में
- Abhay Mishra
उफ़ानों
सा
उठा
है
शोर
दिल
में
लबों
पे
नाम
तेरा
आ
रहा
है
यही
है
वक़्त
कहने
का
उसे
सब
यही
पैग़ाम
कब
से
आ
रहा
है
- Abhay Mishra
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मैं
उस
सेे
दूर
था
तो
शोर
था
साजिश
है,
साजिश
है
उसे
बाहों
में
खुलकर
कस
लिया
दो
पल
तो
हंगामा
Kumar Vishwas
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सफ़र
पीछे
की
जानिब
है
क़दम
आगे
है
मेरा
मैं
बूढ़ा
होता
जाता
हूँ
जवाँ
होने
की
ख़ातिर
Zafar Iqbal
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आहट
सी
कोई
आए
तो
लगता
है
कि
तुम
हो
साया
कोई
लहराए
तो
लगता
है
कि
तुम
हो
Jaan Nisar Akhtar
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इश्क़
अगर
बढ़ता
है
तो
फिर
झगड़े
भी
तो
बढ़ते
हैं
आमदनी
जब
बढ़ती
है
तो
ख़र्चे
भी
तो
बढ़ते
हैं
माना
मंज़िल
नहीं
मिली
है
हमको
लेकिन
रोज़ाना
एक
क़दम
उसकी
जानिब
हम
आगे
भी
तो
बढ़ते
हैं
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Tanoj Dadhich
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दीवारों
पर
दस्तक
देते
रहिएगा
दीवारों
में
दरवाज़े
बन
जाएँगे
Kunwar Bechain
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आज
फिर
कुफ़्र
कमाया
हमने
शोर
को
शे'र
सुनाया
हमने
Vishal Bagh
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मोहब्बत
दो-क़दम
पर
थक
गई
थी
मगर
ये
हिज्र
कितना
चल
रहा
है
Zubair Ali Tabish
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बाहरस
उतना
ही
शोर
मचाता
है
जो
अंदर
से
जितना
ख़ाली
होता
है
Sadia Sawera
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दुश्मनी
का
सफ़र
इक
क़दम
दो
क़दम
तुम
भी
थक
जाओगे
हम
भी
थक
जाएँगे
Bashir Badr
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मंज़िल
पे
न
पहुँचे
उसे
रस्ता
नहीं
कहते
दो
चार
क़दम
चलने
को
चलना
नहीं
कहते
इक
हम
हैं
कि
ग़ैरों
को
भी
कह
देते
हैं
अपना
इक
तुम
हो
कि
अपनों
को
भी
अपना
नहीं
कहते
कम-हिम्मती
ख़तरा
है
समुंदर
के
सफ़र
में
तूफ़ान
को
हम
दोस्तो
ख़तरा
नहीं
कहते
बन
जाए
अगर
बात
तो
सब
कहते
हैं
क्या
क्या
और
बात
बिगड़
जाए
तो
क्या
क्या
नहीं
कहते
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Nawaz Deobandi
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आज
उस
को
कुछ
दिनों
के
बाद
देखा
इस
क़दर
देखा
कभी
देखा
नहीं
था
Abhay Mishra
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बाक़ी
पत्थर
तो
फिर
पूरे
रस्ते
भर
में
होते
हैं
पहली
ठोकर
समझाती
है
आगे
कैसे
जाना
है
Abhay Mishra
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आसमाँ
आज़ाद
रखता
है
हवा
को
वो
मुझे
तो
क़ैद
करती
जा
रही
है
Abhay Mishra
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तुझे
बस
देखने
का
काम
मैंने
हमेशा
मन
लगाकर
के
किया
है
Abhay Mishra
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जा
रहा
हूँ
दूर
उस
से
एक
अर्से
के
लिए
एक
अर्से
के
लिए
हमको
रवानी
चाहिए
Abhay Mishra
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