zulm-o-sitam ko uske na rakha hisaab men | ज़ुल्म-ओ-सितम को उसके न रक्खा हिसाब में

  - Aman Kumar Shaw "Haif"
ज़ुल्म-ओ-सितमकोउसकेरक्खाहिसाबमें
हँसकेहीज़ीस्तकाटीहैहमनेअज़ाबमें
जश्न-ए-फ़िराक़ेयारमेंकाटीहैज़िन्दगी
यूँँरायगाँलिखमुझेअपनीकिताबमें
रौशनमिरेमलालसेचेहराकिसीकाहै
रक्खाकिसीनेहैमुझेहरपलअज़ाबमें
हसरत-ए-दीदपूरीहोकर्बेजिगरहोकम
तूलाशअपनीभेजदेख़तकेजवाबमें
बारातउसकीआईजनाज़ामिराउठा
मैंथानक़ाबपोशथीवोभीहिजाबमें
गुज़रातिरीगलीसेतोयादआयायकयक
कितनीदफ़ागुज़रतेथेइनसेशबाबमें
किसमोड़लायीआशिक़ीक्याहालहोगया
खूनेजिगरहैघुलरहाआँखोंकेआबमें
क़तराबहाकेलेगयाघरबारसबमिरा
सैलाबदेखेऐसेभीमैनेहबाबमें
शामोसहरजोवस्लकीकरताथाज़िदकभी
बा'दफ़िराक़"हैफ़"वोआयाख़ाबमें
  - Aman Kumar Shaw "Haif"
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy