मसअ'ले ज़ीस्त के सबको यूँँ सुनाया न करें

  - Aman Kumar Shaw "Haif"
मसअ'लेज़ीस्तकेसबकोयूँँसुनायाकरें
अश्क़महफ़िलमेंसर-ए-आमबहाएाकरें
मेरीआँखेंकिसीमंज़रकानहींतालिबअब
रौनक-ए-दुनियामुझेआपदिखायाकरें
मानाअंधाहूँमगररास्तेसेवाक़िफ़हूँ
मुझकोजानाहैकिधरआपबतायाकरें
ख़ौफ़खातेहैंफ़क़तनाम-ए-क़ज़ासेसबयाँ
लेकेकांधेपेजनाज़ेकोघुमायाकरें
ख़्वाबकोईभटकजाएकहींराहअपनी
रातहोतेहीचराग़ोंकोबुझायाकरें
मेरीवहशतकोतवायफ़काभरमहोताहै
यूँँसर-ए-शामदर-ओ-बामसजायाकरें
मेरेहालातकोख़ामोशीसेदेखेंचलदे
मेरेमरनेकीख़बरमुझकोसुनायाकरें
रेतसाहिलकीयेकहतीरहीहैसदियोंसे
येमकाँमशग़लाहैआपबनायाकरें
पागलोंजैसेहँसीआतीहैख़ुदपरमुझको
बारहायादमेरीमुझकोदिलायाकरें
मेरीआवारगीकीबढ़तीहैशिद्दतइससेे
किस्सेसहराकेमुझेआपसुनायाकरें
ख़्वाबकोहीसहीपरहोनेदेंपूरा,गहरी
नींदसे"हैफ़"कोयकदमसेउठायाकरें
  - Aman Kumar Shaw "Haif"
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