naqsh-e rah-e visaal mitaata hooñ aaj tak | नक़्श-ए- रह-ए विसाल मिटाता हूँ आज तक

  - Aman Kumar Shaw "Haif"
नक़्श-ए-रह-एविसालमिटाताहूँआजतक
ख़ुदकोमगरउसीकामैंपाताहूँआजतक
तरतीबसेरखोमुझेतुमकिताबमें
बिखराहुआहीमैंउसेभाताहूँआजतक
उसकीगलीनेहीमेरीलूटीहैज़िन्दगी
उसकीगलीकीख़ाकउड़ाताहूँआजतक
आह-ओ-फ़ुग़ान-ए-दर्द-ए-जिगररंज-ए-ज़िन्दगी
इनसेहीअपनापेटचलाताहूँआजतक
उसरहगुज़रकीमौततोकबकीहीहोचुकी
हरशामफिरकिधरकोमैंजाताहूँआजतक
शम्स-ए-ग़ुरूबदेखकेयादअपनीआतीहै
हरशामइकचराग़बुझाताहूँआजतक
जिनहोंठोंकेनसीबमेंथातुझकोचूमना
उनसेेग़म-ए-हयातसुनाताहूँआजतक
हरशामउनकीदीदकीहसरतसीहोतीहै
हरशामइकचराग़जलाताहूँआजतक
अंधेतमाशबीनोंपेकरताभीक्यायक़ीं
ख़ुदसेहीआगघरकीबुझाताहूँआजतक
कुछदाग़दिलमें"हैफ़"केआबादहैंअभी
बज़्म-ए-हयातजिनसेसजाताहूँआजतक
  - Aman Kumar Shaw "Haif"
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