bas ik ghaav ko hi kureda gaya hai | बस इक घाव को ही कुरेदा गया है

  - Aman Kumar Shaw "Haif"
बसइकघावकोहीकुरेदागयाहै
इसीतरहहमकोसतायागयाहै
सुख़नमेंहमेंलिखनाथादर्दअपना
जिगरकेलहूकोनिचोड़ागयाहै
क़बाजोउतारूँबदनगिरपड़ेगा
येकिसहालमेंमुझकोछोड़ागयाहै
मैंबाज़ारमेंआख़िरीशयथायारों
घटाकरमेरादामबेचागयाहै
सर-ए-बज़्मफिरयूँँहुआकेहमीको
हमाराहीक़िस्सासुनायागयाहै
कमीजबभीआईग़मोंकीग़ज़लमें
ज़मानेसेइनकोख़रीदागयाहै
जहाँभीगएसाथवहशतकोलेकर
वहींसेहमेंफिरनिकालागयाहै
येपलकेंयूँँबेवज्हभारीनहींहैं
ग़म-ए-ज़ीस्तइनपरहीलादागयाहै
कहाँ`हैफ़`नेजीहैयेज़िन्दगानी
समझिएकिबसवक़्तकाटागयाहै
  - Aman Kumar Shaw "Haif"
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