log sah lete the hañs kar kabhi be-zaari bhi | लोग सह लेते थे हँस कर कभी बे-ज़ारी भी

  - Shariq Kaifi
लोगसहलेतेथेहँसकरकभीबे-ज़ारीभी
अबतोमश्कूकहुईअपनीमिलन-सारीभी
वारकुछख़ालीगएमेरेतोफिरहीगई
अपनेदुश्मनकोदु'आदेनेकीहुश्यारीभी
उम्रभरकिसनेभलाग़ौरसेदेखाथामुझे
वक़्तकमहोतोसजादेतीहैबीमारीभी
किसतरहआएहैंइसपहलीमुलाक़ाततलक
औरमुकम्मलहैजुदाहोनेकीतय्यारीभी
ऊबजाताहूँज़ेहानतकीनुमाइशसेतोफिर
लुत्फ़देताहैयेलहजामुझेबाज़ारीभी
उम्रबढ़तीहैमगरहमवहींठहरेहुएहैं
ठोकरेंखाईंतोकुछआएसमझदारीभी
अबजोकिरदारमुझेकरनाहैमुश्किलहैबहुत
मस्तहोनेकादिखावाभीहैसरभारीभी
  - Shariq Kaifi
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