ajab shikast ka ehsaas dil pe chaaya tha | अजब शिकस्त का एहसास दिल पे छाया था

  - Shariq Kaifi
अजबशिकस्तकाएहसासदिलपेछायाथा
किसीनेमुझकोनिशानानहींबनायाथा
उसीनिगाहनेआँखोंकोकरदियापत्थर
उसीनिगाहमेंसबकुछनज़रभीआयाथा
यहाँतोरेतहैपत्थरहैंऔरकुछभीनहीं
वोक्यादिखानेमुझेइतनीदूरलायाथा
उलझगयाहूँकुछऐसाकियादभीतोनहीं
येवहमपहले-पहलकैसेदिलमेंआयाथा
वोमैंनहींथातुम्हारीतरफ़सरकताहुआ
हवसनेतीरगीकाफ़ाएदाउठायाथा
बिछड़नाइतनाहीआसानथाअगरउससे
तोख़ुद-कुशीकायेसामानक्यूँँजुटायाथा
गिलातोआजभीसच्चाईहैमगर'शारिक़'
येझूटउससेमेंपहलेहीबोलआयाथा
  - Shariq Kaifi
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