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Shan Sharma
sharaafat raat men tum shaan akshar bhool jaate ho
sharaafat raat men tum shaan akshar bhool jaate ho | शराफ़त रात में तुम 'शान' अक्सर भूल जाते हो
- Shan Sharma
शराफ़त
रात
में
तुम
'शान'
अक्सर
भूल
जाते
हो
सुनो
तुम
दस
बजे
के
बाद
मुझ
सेे
बात
मत
करना
- Shan Sharma
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तिरे
सिवा
भी
कहीं
थी
पनाह
भूल
गए
निकल
के
हम
तिरी
महफ़िल
से
राह
भूल
गए
Majrooh Sultanpuri
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हमेशा
यही
भूल
करता
रहा
तेरा
साथ
पाने
को
मरता
रहा
सुनहरे
बहारों
के
मौसम
तले
गुलिस्ताँ
हमारा
बिखरता
रहा
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Ambar
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जो
अंजान
थे
वो
मेरे
यार
निकले
मगर
जो
भी
अपने
थे
बेकार
निकले
ज़मीं
खा
गई
उन
वफ़ाओं
को
आख़िर
सितम
ये
हुआ
हम
गुनहगार
निकले
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Hameed Sarwar Bahraichi
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सुब्ह
तक
वज्ह-ए-जाँ-कनी
थी
जो
बात
मैं
उसे
शाम
ही
को
भूल
गया
Jaun Elia
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चाहे
तो
कोशिश
कर
लो
दावा
है
भूल
न
पाओगी
जब
भी
ज़िक्र-ए-वफ़ा
होगा
तुम
मेरे
शे'र
सुनाओगी
Harsh saxena
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हाथ
मेरे
भूल
बैठे
दस्तकें
देने
का
फ़न
बंद
मुझ
पर
जब
से
उस
के
घर
का
दरवाज़ा
हुआ
Parveen Shakir
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वो
तिरे
नसीब
की
बारिशें
किसी
और
छत
पे
बरस
गईं
दिल-ए-बे-ख़बर
मिरी
बात
सुन
उसे
भूल
जा
उसे
भूल
जा
Amjad Islam Amjad
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यहाँँ
अनजान
हो
तुम
भी
यहाँँ
अनजान
हैं
हम
भी
किसी
की
जान
हो
तुम
भी
किसी
की
जान
हैं
हम
भी
बड़े
नादान
हो
तुम
भी
बड़े
नादान
हैं
हम
भी
अतः
वीरान
हो
तुम
भी
अतः
वीरान
हैं
हम
भी
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Vivek Vistar
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अब
तो
हर
बात
याद
रहती
है
ग़ालिबन
मैं
किसी
को
भूल
गया
Jaun Elia
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हम
तो
समझे
थे
कि
हम
भूल
गए
हैं
उन
को
क्या
हुआ
आज
ये
किस
बात
पे
रोना
आया
Sahir Ludhianvi
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मिरा
दिल
काम
करता
है
सभी
वैसे
सलीक़े
के
यक़ीं
करने
का
लेकिन
काम
ये
बेकार
करता
है
Shan Sharma
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ढूँढते
हैं
लोग
दिलबर
दूसरा
फिर
तीसरा
मुस्तक़िल
अब
आशिक़ी
की
नौकरी
रहती
नहीं
Shan Sharma
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राएगाँ
थे
या
फिर
अमानत
थे
जो
भी
थे
हम
तिरी
बदौलत
थे
बन
गए
तल्ख़
आजकल
वैसे
हम
सरापा
कभी
मोहब्बत
थे
चाहतें
दिल
की
बेमुरव्वत
थी
दिल
के
सब
फ़ैसले
हिमाक़त
थे
थीं
दरारें
मिरी
हक़ीक़त
में
वहम
हर
चाक
की
मरम्मत
थे
वो
मजाज़ी
सी
इक
हसीना
थी
'शान'
के
शे'र
जिसके
बाबत
थे
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Shan Sharma
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रात
भर
आँख
पानी-पानी
थी
अश्क़
थे
इश्क़
की
निशानी
थी
तू
था
यकसर
जहाँ
मुझे
हासिल
यार
दिलकश
बहुत
कहानी
थी
दूर
हैं
हम
तो
पड़
गई
नीली
साथ
थे
शाम
ज़ाफ़रानी
थी
नाम
वैसे
ग़ुलाम
मेरा
था
शाह
की
पर
ग़ुलाम
रानी
थी
ज़ुल्फ़
उसकी
तराश
देता
था
मेरी
ख़ातिर
ये
बाग़वानी
थी
सब
नए
ख़त
जला
दिए
मैंने
बात
उन
में
वही
पुरानी
थी
वस्ल
के
दौर
जो
थी
आँखों
में
'शान'
वो
बूँद
शादमानी
थी
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Shan Sharma
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आँसू
आकर
ग़म
को
ऐसे
धो
जाते
गंगा
माँ
धोती
हैं
जैसे
पापों
को
Shan Sharma
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