zameen kii berookhi sah ke yuñ ghaayal ho gaya hooñ | ज़मीं की बेरुख़ी सह के यूँँ घाइल हो गया हूँ

  - Shan Sharma
ज़मींकीबेरुख़ीसहकेयूँँघाइलहोगयाहूँ
समुन्दरचूमकेमैंयारबादलहोगयाहूँ
ज़मानेकेकिताबीइल्मसेऊपरहूँअबमैं
येजाहिलकहरहेमुझकोकिपागलहोगयाहूँ
रुआँसीरूहघुटकेमरगईहैइसबदनमें
निगलकेजिस्मकीमैंरेतदलदलहोगयाहूँ
तुम्हारेसाथतोथोड़ीख़लाएँभीयहाँथी
तुम्हारेबादतोयक्सरमुकम्मलहोगयाहूँ
बहारेंपूछनेआईथींकलशबहालमेरा
ख़िज़ाँनेकहदियापतझड़काआँचलहोगयाहूँ
मुझेगुमनामकहके'शान'तुमतोचलदिएथे
तुम्हारेनामकादुश्मनमुसलसलहोगयाहूँ
  - Shan Sharma
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