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shampa andaliib
kya hi hua jo hasrat-e-deedaar men mari
kya hi hua jo hasrat-e-deedaar men mari | क्या ही हुआ जो हसरत-ए-दीदार में मरी
- shampa andaliib
क्या
ही
हुआ
जो
हसरत-ए-दीदार
में
मरी
कुछ
दिन
तो
मुन्तज़िर
थी
दर-ए-यार
पर
निगाह
- shampa andaliib
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हुस्न
को
भी
कहाँ
नसीब
'जिगर'
वो
जो
इक
शय
मिरी
निगाह
में
है
Jigar Moradabadi
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हमें
दीदार
से
मरहूम
रखकर
है
नज़र
दिल
पर
पराया
माल
ताको
और
दौलत
अपनी
रहने
दो
Dagh Dehlvi
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दिलों
की
बातें
दिलों
के
अंदर
ज़रा
सी
ज़िद
से
दबी
हुई
हैं
वो
सुनना
चाहें,
ज़ुबां
से
सब
कुछ
मैं
करना
चाहूँ
नज़र
से
बतियां
ये
इश्क़
क्या
है,
ये
इश्क़
क्या
है,
ये
इश्क़
क्या
है,
ये
इश्क़
क्या
है
सुलगती
सांसें,
तरसती
आँखें,
मचलती
रूहें,
धड़कती
छतियां
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Aalok Shrivastav
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हुस्न
को
हुस्न
बनाने
में
मिरा
हाथ
भी
है
आप
मुझ
को
नज़र-अंदाज़
नहीं
कर
सकते
Rais Farog
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देखो
तो
चश्म-ए-यार
की
जादू-निगाहियाँ
बेहोश
इक
नज़र
में
हुई
अंजुमन
तमाम
Hasrat Mohani
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तुम्हें
देखे
ज़माना
हो
गया
है
नज़र
महके
ज़माना
हो
गया
है
बिछड़के
तुम
सेे
आँखें
बुझ
गई
हैं
ये
दिल
धड़के
ज़माना
हो
गया
है
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Subhan Asad
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हुस्न
सब
को
ख़ुदा
नहीं
देता
हर
किसी
की
नज़र
नहीं
होती
Ibn E Insha
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जिस
की
जानिब
'अदा'
नज़र
न
उठी
हाल
उस
का
भी
मेरे
हाल
सा
था
Ada Jafarey
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बोसा
देते
नहीं
और
दिल
पे
है
हर
लहज़ा
निगाह
जी
में
कहते
हैं
कि
मुफ़्त
आए
तो
माल
अच्छा
है
Mirza Ghalib
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लौट
जाती
है
उधर
को
भी
नज़र
क्या
कीजे
अब
भी
दिलकश
है
तेरा
हुस्न
मगर
क्या
कीजे
Faiz Ahmad Faiz
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मोहब्बत
है
मुझे
तुझ
से
मोहब्बत
तू
मेरे
काम
का
ज़रिया
नहीं
ह
shampa andaliib
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ग़ुबार-ए-ग़म
नज़र
से
छट
रहा
है
बहुत
दिन
बाद
आया
ईद
का
दिन
shampa andaliib
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हम
भी
पाते
मक़ाम
दुनिया
में
वक़्त
होता
जो
मेहरबाँ
हम
पर
shampa andaliib
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तूफ़ाँ
से
जूझते
हुए
वहशत
में
आ
गए
फिर
यूँँ
जले
चराग़
कि
बस
आग
लग
गई
shampa andaliib
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बहुत
से
ख़ास
रिश्तों
में
दरारें
पड़
चुकी
हैं
अब
हमारी
सादगी
दुश्मन
हमारी
बन
गई
यारों
shampa andaliib
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