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shampa andaliib
raushni kam ho rahi hai
raushni kam ho rahi hai | रौशनी कम हो रही है
- shampa andaliib
रौशनी
कम
हो
रही
है
ज़िंदगी
कम
हो
रही
है
और
उलझन
हैं
जिगर
में
शा'इरी
कम
हो
रही
है
सब
ही
मतलब
से
जुड़े
हैं
दोस्ती
कम
हो
रही
है
उम्र
बढ़ती
जा
रही
है
आगही
कम
हो
रही
है
हर
जगह
अब
शोर-ओ-गुल
है
ख़ामुशी
कम
हो
रही
है
दिल
बराबर
जल
रहा
है
रौशनी
कम
हो
रही
है
- shampa andaliib
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उसको
नंबर
देके
मेरी
और
उलझन
बढ़
गई
फोन
की
घंटी
बजी
और
दिल
की
धड़कन
बढ़
गई
Ana Qasmi
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किसी
की
तपिश
में
ख़ुशी
है
किसी
की
किसी
की
ख़लिश
में
मज़ा
है
किसी
का
Unknown
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जिसने
बेचैनियाँ
दी
हैं
मुझे
बेचैन
रहे
मैंने
रो-रो
के
ख़ुदास
ये
दु'आ
माँगी
है
Shajar Abbas
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ये
ज़मीं
किस
क़दर
सजाई
गई
ज़िंदगी
की
तड़प
बढ़ाई
गई
आईने
से
बिगड़
के
बैठ
गए
जिन
की
सूरत
जिन्हें
दिखाई
गई
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Sahir Ludhianvi
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रात
बेचैन
सी
सर्दी
में
ठिठुरती
है
बहुत
दिन
भी
हर
रोज़
सुलगता
है
तिरी
यादों
से
Amit Sharma Meet
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बन
कर
कसक
चुभती
रही
दिल
में
मिरे
इक
आह
थी
ऐ
हम–नफ़स
मेरे
मुझे
तुझ
सेे
वफ़ा
की
चाह
थी
Dhiraj Singh 'Tahammul'
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मेरे
महबूब
मत
बेचैन
होना
तेरे
क़ासिद
ने
ख़त
पहुँचा
दिया
है
Shajar Abbas
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वो
तड़प
जाए
इशारा
कोई
ऐसा
देना
उस
को
ख़त
लिखना
तो
मेरा
भी
हवाला
देना
Azhar Inayati
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बड़ी
जल्दी
में
था
उस
दिन
ज़रा
बेचैन
भी
था
वो
उसे
कहना
था
कुछ
मुझ
सेे
मगर
वो
कह
नहीं
पाया
Varun Anand
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मैं
पा
सका
न
कभी
इस
ख़लिश
से
छुटकारा
वो
मुझ
से
जीत
भी
सकता
था
जाने
क्यूँँ
हारा
Javed Akhtar
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जब
न
आएँ
नज़र
हज़ारों
में
ढूँढ़
लेना
हमें
सितारों
में
ख़ैर
तुम
ने
भी
दिल
दुखा
ही
दिया
तुम
को
रक्खा
था
ग़म-गुसारों
में
तेरी
तस्वीर
ग़र्क़
होती
है
रोज़
आँखों
के
आबशारों
में
ना-ख़ुदा
बढ़
चलो
भँवर
की
सम्त
क्या
ही
रक्खा
है
इन
किनारों
में
इनकी
आँखों
में
ग़ौर
से
देखो
कितनी
उजलत
है
बे-सहारों
में
बाद
मुद्दत
के
बाम
पर
आकर
खो
गए
आज
चाँद
तारों
में
आज
तो
अंदलीब
अपना
भी
दिल
नहीं
लग
रहा
बहारों
में
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shampa andaliib
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मैं
ने
रो
कर
किया
ज़रा
हल्का
दिल
तो
औक़ात
पर
उतर
आया
shampa andaliib
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मुसलसल
तक
रही
तस्वीर
उनकी
जिन्हें
देखा
नहीं
जी
भर
के
मैंने
shampa andaliib
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रोना
भी
चाहा
तो
मुझे
रोने
नहीं
दिया
उस
आँख
ने
सुकून
से
सोने
नहीं
दिया
shampa andaliib
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ख़त
ही
आया
न
कोई
उस
का
न
दिलबर
आया
देखते
देखते
फिर
माहे
दिसम्बर
आया
shampa andaliib
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