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shampa andaliib
kya kahein khwaab bas khwaab hi rah ga.e
kya kahein khwaab bas khwaab hi rah ga.e | क्या कहें ख़्वाब बस ख़्वाब ही रह गए
- shampa andaliib
क्या
कहें
ख़्वाब
बस
ख़्वाब
ही
रह
गए
हम
वहीं
आ
गए
जिस
जगह
से
चले
फिर
किसी
याद
में
मुब्तिला
हो
गई
आज
फिर
बज
गए
एक
दो
रात
के
बाम-ओ-दर
रहगुज़र
हम
सफ़र
ग़म-गुसार
सब
बदल
से
गए
देखते
देखते
दम-ब-दम
हम
चले
जा
रहे
हैं
फ़क़त
देखते
हैं
कहाँ
किस
जगह
दिल
लगे
मैं
भी
साहिल
से
नीचे
उतरने
लगी
कोई
आया
नहीं
जब
इधर
लौट
के
- shampa andaliib
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कुछ
तो
दुख
से
नजात
मिल
जाए
जब
तलक
आप
पास
बैठे
हैं
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तेरी
मुस्कान
मेरे
ज़ख़्मों
पर
रोज़
मरहम
का
काम
करती
है
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किसी
से
अब
कोई
शिकवा
नहीं
है
हमारा
वक़्त
ही
अच्छा
नहीं
है
फ़लक
पर
धुंध
ही
है
या
हमीं
ने
अभी
तक
ग़ौर
से
देखा
नहीं
है
हमारी
ज़िंदगी
रफ़्तार
में
है
हमारे
पास
कुछ
रुकता
नहीं
है
ये
सूनी
खिड़कियाँ
अब
बोलती
हैं
कोई
परदेस
से
लौटा
नहीं
है
कई
सदमों
से
वाक़िफ़
हो
चुका
है
ग़नीमत
है
कि
दिल
बैठा
नहीं
है
ख़ुशी
की
बात
है
ख़ुश
हैं
हमारे
ख़ुशी
की
बात
पर
रोना
नहीं
है
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हँसता
ही
जा
रहा
मुझे
हर
कोई
देख
कर
घंटों
से
मुब्तिला
हूँ
मैं
कार-ए-फ़ुज़ूल
में
shampa andaliib
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काम
शायद
तुम्हारे
आ
जाऊँ
मेरे
बारे
में
सोच
कर
देखो
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