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Shakir Dehlvi
jheel si aankhoñ men kitne raaz hain mat poochiye
jheel si aankhoñ men kitne raaz hain mat poochiye | झील सी आँखों में कितने राज़ हैं मत पूछिए
- Shakir Dehlvi
झील
सी
आँखों
में
कितने
राज़
हैं
मत
पूछिए
राज़
इतने
हैं
कि
उन
पर
शोध
कर
सकता
हूँ
मैं
- Shakir Dehlvi
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लिपट
भी
जा
न
रुक
'अकबर'
ग़ज़ब
की
ब्यूटी
है
नहीं
नहीं
पे
न
जा
ये
हया
की
ड्यूटी
है
Akbar Allahabadi
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दीवारें
छोटी
होती
थीं
लेकिन
पर्दा
होता
था
तालों
की
ईजाद
से
पहले
सिर्फ़
भरोसा
होता
था
Azhar Faragh
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अल्लाह
अल्लाह
हुस्न
की
ये
पर्दा-दारी
देखिए
भेद
जिस
ने
खोलना
चाहा
वो
दीवाना
हुआ
Arzoo Lakhnavi
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जो
उन
को
लिपटा
के
गाल
चूमा
हया
से
आने
लगा
पसीना
हुई
है
बोसों
की
गर्म
भट्टी
खिंचे
न
क्यूँँकर
शराब-ए-आरिज़
Ahmad Husain Mail
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मुँह
फेर
कर
वो
कहते
हैं
बस
मान
जाइए
इस
शर्म
इस
लिहाज़
के
क़ुर्बान
जाइए
Bekhud Dehelvi
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फ़र्क़
इतना
है
कि
तू
पर्दे
में
और
मैं
बे-हिजाब
वर्ना
मैं
अक्स-ए-मुकम्मल
हूँ
तिरी
तस्वीर
का
Asad Bhopali
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न
तेरे
आने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
न
दिल
लगाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
क़सम
ख़ुदा
की
बताता
हूँ
राज़
ये
तुमको
नहारी
खाने
से
मेरा
शबाब
लौटा
है
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Paplu Lucknawi
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चुप
रहते
हैं
चुप
रहने
दो
राज़
बताओ
खोले
क्या
बात
वफ़ा
की
तुम
करती
हो
बोलो
हम
कुछ
बोले
क्या
उल्फ़त
तो
अफ़साना
है
तुम
करती
खूब
सियासत
हो
हम
भी
हैं
मक़बूल
बहुत
अब
बोल
किसी
के
होलें
क्या
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Anand Raj Singh
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लजा
कर
शर्म
खा
कर
मुस्कुरा
कर
दिया
बोसा
मगर
मुँह
को
बना
कर
Unknown
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मुझ
को
ये
आरज़ू
वो
उठाएँ
नक़ाब
ख़ुद
उन
को
ये
इंतिज़ार
तक़ाज़ा
करे
कोई
Asrar Ul Haq Majaz
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कुछ
शिकायत
है
तो
घर
आओ
कभी
फ़ुर्सत
में
मैं
तमाशा
सर-ए-बाज़ार
नहीं
कर
सकता
Shakir Dehlvi
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ख़ामुशी
दूरियाँ
बढ़ाती
है
और
बढ़ाती
है
बद-गुमानी
भी
Shakir Dehlvi
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आसमाँ
जब
ज़मीं
पे
बैठ
गया
जो
जहाँ
था
वहीं
पे
बैठ
गया
कुछ
सितारे
ज़मीं
पे
रौशन
थे
मैं
भी
जाकर
वहीं
पे
बैठ
गया
इक
कबूतर
ख़याल
का
तेरे
उड़
के
आया
जबीं
पे
बैठ
गया
बल्लियों
कूदता
उछलता
दिल
आपकी
इक
नहीं
पे
बैठ
गया
मुफ़्त
में
दे
दिया
मकान-ए-दिल
जब
भरोसा
मकीं
पे
बैठ
गया
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Shakir Dehlvi
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ख़ुद
तो
नहीं
बदला
वो
बदलता
है
मगर
रोज़
बातें
कभी
लहजा
कभी
हुलिया
मेरे
आगे
Shakir Dehlvi
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सिर्फ़
काग़ज़
क़लम
नहीं
साहब
ख़ूं
भी
लगता
है
शा'इरी
के
लिए
Shakir Dehlvi
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