mirii zindagi pe na muskuraa mujhe zindagi ka alam nahin | मिरी ज़िंदगी पे न मुस्कुरा मुझे ज़िंदगी का अलम नहीं

  - Shakeel Badayuni
मिरीज़िंदगीपेमुस्कुरामुझेज़िंदगीकाअलमनहीं
जिसेतेरेग़मसेहोवास्तावोख़िज़ाँबहारसेकमनहीं
मिराकुफ़्रहासिल-ए-ज़ोहदहैमिराज़ोहदहासिल-ए-कुफ़्रहै
मिरीबंदगीवोहैबंदगीजोरहीन-ए-दैर-ओ-हरमनहीं
मुझेरासआएँख़ुदाकरेयहीइश्तिबाहकीसाअतें
उन्हेंऐतबार-ए-वफ़ातोहैमुझेऐतबार-ए-सितमनहीं
वहीकारवाँवहीरास्तेवहीज़िंदगीवहीमरहले
मगरअपनेअपनेमक़ामपरकभीतुमनहींकभीहमनहीं
वोशान-ए-जब्र-ए-शबाबहैवोरंग-ए-क़हर-ए-इताबहै
दिल-ए-बे-क़रारपेइनदिनोंहैसितमयहीकिसितमनहीं
फ़नामिरीबक़ामिरीमुझे'शकील'ढूँढिए
मैंकिसीकाहुस्न-ए-ख़यालहूँमिराकुछवजूदअदमनहीं
  - Shakeel Badayuni
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