akelaa rahne ki KHud hi saza qubool ki hai | अकेले रहने की ख़ुद ही सज़ा क़ुबूल की है

  - Shakeel Azmi
अकेलेरहनेकीख़ुदहीसज़ाक़ुबूलकीहै
येहमनेइश्क़कियाहैयाकोईभूलकीहै
ख़यालआयाहैअबरास्ताबदललेंगे
अभीतलकतोबहुतज़िंदगीफ़ुज़ूलकीहै
ख़ुदाकरेकियेपौदाज़मींकाहोजाए
किआरज़ूमिरेआँगनकोएकफूलकीहै
जानेकौनसालम्हामिरेक़रारकाहै
जानेकौनसीसाअ'ततिरेहुसूलकीहै
जानेकौनसाचेहरामिरीकिताबकाहै
जानेकौनसीसूरततिरेनुज़ूलकीहै
जिन्हेंख़यालहोआँखोंकालौटजाएँवो
अबइसकेबा'दहुकूमतसफ़रमेंधूलकीहै
येशोहरतेंहमेंयूँँहीनहींमिलीहैं'शकील'
ग़ज़लनेहमसेभीबहुतवसूलकीहै
  - Shakeel Azmi
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